पीएम सूर्य घर योजना की सुस्त पड़ी रफ्तार
नई दिल्ली । डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' अपने लक्ष्यों को हासिल करने में चुनौतियों का सामना कर रही है. भारी सब्सिडी के बावजूद, बैंकों द्वारा ऋण देने में देरी और राज्य बिजली वितरण कंपनियों के सीमित सहयोग के कारण आवासीय सौर ऊर्जा का विस्तार धीमा पड़ा है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च तक 40 लाख घरों में पैनल लगाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 23.6 लाख इंस्टॉलेशन ही हो पाए हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि इस सुस्ती का मुख्य कारण बैंकों की ऋण संबंधी प्रक्रियाएं और राज्यों की हिचकिचाहट है.
आंकड़ों के मुताबिक, योजना के तहत आए आवेदनों में से लगभग 60% अभी भी लंबित हैं और 7% को खारिज कर दिया गया है.
बैंक अधिकारियों का तर्क है कि वे सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए कड़े दस्तावेजों की मांग कर रहे हैं, जबकि वेंडर्स का कहना है कि बिजली बिलों के पुराने रिकॉर्ड और जमीन के मालिकाना हक जैसे विवादों के कारण लोन रिजेक्ट हो रहे हैं.
इसके अलावा, राजस्थान जैसे राज्यों में बैंक बिना किसी आधिकारिक निर्देश के छोटे ऋणों के लिए भी गारंटी मांग रहे हैं, जिससे उपभोक्ता हतोत्साहित हो रहे हैं.
दूसरी ओर, राज्य बिजली कंपनियां भी इस योजना को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं. उन्हें डर है कि अगर संपन्न परिवार सौर ऊर्जा अपना लेंगे, तो ग्रिड से बिजली की बिक्री कम होगी, जिससे उनके राजस्व को भारी नुकसान होगा.
विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन बाधाओं को जल्द दूर नहीं किया गया, तो 2030 तक 500 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता हासिल करने का भारत का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है और देश की कोयले पर निर्भरता बनी रह सकती है.
हालांकि, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि वे प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए काम कर रहे हैं और यह योजना भविष्य में उपभोक्ताओं के बिजली बिल कम करने में मददगार साबित होगी.