पेज़ेशकियन: बाहरी खतरों के बीच एकता की अपील और परमाणु वार्ता के संकेत
तेहरान । डेस्क: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इस्लामी गणराज्य की स्थापना की 47वीं वर्षगांठ के अवसर पर तेहरान में आयोजित एक विशाल सार्वजनिक समारोह में देश को संबोधित किया. इस ऐतिहासिक मौके पर उन्होंने बाहरी खतरों के बीच राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया और साथ ही यह स्पष्ट संकेत दिया कि उनकी सरकार अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए तैयार है.
यह समारोह ऐसे समय में आयोजित किया गया है जब ईरान अपने हालिया इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है. राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में भारी भीड़ उमड़ी, जिसे सरकार के प्रति समर्थन के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है.
राष्ट्रपति पेज़ेशकियन का यह संबोधन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगातार मिल रही सैन्य धमकियों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आया है. ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए परमाणु संवर्धन और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे मुद्दों पर मांगें न मानने की स्थिति में सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है.
इसके बावजूद, पेज़ेशकियन ने तेहरान के आज़ादी स्क्वायर पर जमा भीड़ से कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता और वह किसी भी प्रकार के सत्यापन के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने परमाणु वार्ता में गतिरोध के लिए अमेरिका और यूरोप द्वारा निर्मित "अविश्वास की ऊंची दीवार" को जिम्मेदार ठहराया.
देश में हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक बदहाली पर बात करते हुए पेज़ेशकियन ने एक संवेदनशील रुख अपनाया. उन्होंने सरकार की कमियों के लिए जनता से माफी मांगी और आश्वासन दिया कि उनकी सरकार समस्याओं को सुलझाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है.
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम लोगों की आवाज सुनने के लिए तैयार हैं; हम जनता के सेवक हैं, उनके विरोधी नहीं." हालांकि, उन्होंने अशांति भड़काने के लिए विदेशी दुष्प्रचार को भी दोषी ठहराया. विशेषज्ञ इस भाषण को ईरान की ओर से अमेरिका के साथ एक 'उचित और संतुलित सौदे' के लिए खुले होने के संकेत के रूप में देख रहे हैं, बशर्ते ईरान के संप्रभु अधिकारों का सम्मान किया जाए.
एक तरफ जहां तेहरान की सड़कों पर 'अमेरिका और इजरायल विरोधी' नारेबाजी हुई और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया गया, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक हलचल भी तेज है. ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ओमान और कतर के दौरे पर हैं, जो अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.
यह कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में हो रहे हैं जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात कर ईरान के खिलाफ अपनी चिंताओं को साझा करने वाले हैं. कुल मिलाकर, पेज़ेशकियन का यह भाषण आंतरिक घावों को भरने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर लचीलापन दिखाने की एक दोहरी रणनीति प्रतीत होता है.