ईरान में सीमित जमीनी सैन्य अभियानों की तैयारी में पेंटागन
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी अखबार 'द वाशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ईरान में कई हफ्तों तक चलने वाले सीमित जमीनी सैन्य अभियानों की रूपरेखा तैयार कर रहा है. इन योजनाओं में ईरान के महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तटीय क्षेत्रों पर छापेमारी शामिल हो सकती है. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से किए गए इस दावे ने क्षेत्र में पूर्ण युद्ध की आशंकाओं को गहरा दिया है, हालांकि रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह योजना एक पूर्ण आक्रमण के बजाय विशिष्ट लक्ष्यों पर केंद्रित होगी.
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन ईरानी हथियारों और मिसाइल ठिकानों को नष्ट करना है, जो वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों के लिए खतरा बने हुए हैं. फिलहाल यह अनिश्चित है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इन योजनाओं को अंतिम मंजूरी देंगे या नहीं. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पेंटागन का काम कमांडर-इन-चीफ को अधिकतम विकल्प देना है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रपति ने कोई अंतिम निर्णय ले लिया है.
युद्ध के पांचवें सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति को और मजबूत कर दिया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के लगभग 3,500 अतिरिक्त सैनिक 'यूएसएस त्रिपोली' के जरिए क्षेत्र में पहुंच चुके हैं. इसके साथ ही 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को भेजने की भी तैयारी है.
दूसरी ओर, ईरान ने इन खबरों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि ईरानी सेना अमेरिकी सैनिकों के जमीन पर आने का इंतजार कर रही है ताकि उन्हें कड़ा सबक सिखाया जा सके.
गालिबाफ ने कहा कि दुश्मन एक तरफ बातचीत का संदेश भेजता है और दूसरी तरफ गुप्त हमले की योजना बनाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की मिसाइलें तैनात हैं और वे किसी भी क्षेत्रीय देश के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से नहीं हिचकिचाएंगे जो अमेरिका की मदद करेगा.
इस बीच, ईरान के नौसेना प्रमुख शाहराम ईरानी ने अमेरिकी विमान वाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' को सीधे निशाने पर लेने की धमकी दी है. उन्होंने कहा कि 4 मार्च को डूबे ईरानी युद्धपोत 'डेना' का बदला लेने के लिए उनकी नौसेना पूरी तरह तैयार है.
तनाव केवल खाड़ी तक सीमित नहीं है. ईरानी सूत्रों ने संकेत दिया है कि यदि उनके द्वीपों या मुख्य भूमि पर कोई कार्रवाई हुई, तो वे लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में एक नया मोर्चा खोल सकते हैं. इसमें यमन के हूती विद्रोहियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है.
दिलचस्प बात यह है कि सैन्य हलचल के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं. पाकिस्तान इस संकट को टालने के लिए मध्यस्थता कर रहा है और सऊदी अरब, तुर्की तथा मिस्र के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत की मेजबानी कर रहा है. पूरी दुनिया की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति, युद्ध के इन बादलों को छांट पाएगी या मध्य पूर्व एक बड़े संघर्ष की आग में झुलस जाएगा.