पेंशन विवाद: छत्तीसगढ़ ने MP से मांगे ₹10,133 करोड़
भोपाल । डेस्क: मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बने 25 साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब बंटवारे की 'सेपरेशन मनी' को लेकर दोनों राज्यों के बीच एक नया वित्तीय मामला गरमा गया है. छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार से बकाया फंड के रूप में 10,133 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की है.
यह मामला 27 फरवरी को मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सामने आया, जब विपक्षी नेता उमंग सिंघार के सवाल पर उप-मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने लिखित जवाब पेश किया. सरकार ने सदन को बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 अगस्त 2025 को एक आधिकारिक पत्र भेजकर इस राशि पर अपना दावा ठोका है.
दरअसल, यह पूरा विवाद उन सरकारी कर्मचारियों की पेंशन देनदारी से जुड़ा है, जिन्होंने साल 2000 में राज्य विभाजन के समय छत्तीसगढ़ का विकल्प चुना था और वहीं से सेवानिवृत्त हुए.
मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 के तहत दोनों राज्यों के बीच पेंशन देनदारियों का बंटवारा जनसंख्या के अनुपात (48,566: 17,615) में किया जाना तय हुआ था.
छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि पेंशन भुगतानों के ऑडिट और पुन: सत्यापन के बाद यह पाया गया कि मध्य प्रदेश की ओर 10,133 करोड़ रुपये की देनदारी शेष है. इस गंभीर मसले को सुलझाने के लिए 28 नवंबर 2025 को दोनों राज्यों के अधिकारियों का एक साझा कार्य समूह गठित किया गया है, जो फिलहाल इस दावे का अध्ययन कर रहा है.