पाकिस्तान बढ़ायेगा जल भंडारण क्षमता
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार ने जल भंडारण क्षमता को बढ़ाने का फैसला किया है क्योंकि भारत ने 1960 के सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है.
शरीफ ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के दौरे के दौरान यह बात कही. उन्होंने कहा, "हम अगले कुछ वर्षों में अपने संसाधनों से यह क्षमता विकसित करेंगे. इसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की महत्वपूर्ण भूमिका होगी."
शरीफ ने भारत को "दुश्मन" करार देते हुए आरोप लगाया कि वह सिंधु जल संधि के खिलाफ कदम उठा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार डायमर भाशा बांध जैसे परियोजनाओं का उपयोग करके "गैर-विवादास्पद जल भंडारण क्षमता" बनायेगी.
यह कदम पाकिस्तान की कृषि के लिए अहम है, जो सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर बहुत हद तक निर्भर है. इन नदियों के जल प्रवाह में किसी भी तरह की रुकावट से पाकिस्तान की खेती को भारी नुकसान हो सकता है.
शरीफ ने 2022 के विनाशकारी बाढ़ का जिक्र करते हुये कहा कि पाकिस्तान जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों का सामना कर रहा है, जबकि उसका इसमें योगदान नगण्य है. उस बाढ़ में 1,700 से अधिक लोगों की जान गई, हजारों हेक्टेयर खेत बर्बाद हुये और लगभग 30 अरब रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ.
उन्होंने कहा कि मौसम और आपदा चेतावनियों को मोबाइल संदेशों के जरिये लोगों तक नियमित रूप से पहुंचाने के लिये पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण के साथ मिलकर काम किया जाएगा.
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने को भी गंभीर खतरा बताया. उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी के कारण ग्लेशियरों का पिघलना चिंता का विषय है और इसके लिए उच्चतम स्तर की तैयारी जरूरी है.
पाकिस्तान की यह पहल न केवल जल संकट से निपटने की दिशा में एक कदम है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ देश को और मजबूत करने की कोशिश भी है.