पाकिस्तान: पंजाब पुलिस की 'एनकाउंटर' में 8 महीनों में 924 मौतें !
लाहौर । डेस्क: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अपराध नियंत्रण विभाग (सीसीडी) द्वारा की गई पुलिस मुठभेड़ों में मात्र आठ महीनों में 924 संदिग्धों की मौत हो गई है. ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एचआरसीपी) की एक तथ्य-जांच रिपोर्ट ने इसे "व्यवस्थित एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग" की नीति करार दिया है, जो कानून और संविधान का उल्लंघन है.
रिपोर्ट 17 फरवरी 2026 को जारी की गई, जिसमें अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 तक के कम से कम 670 एनकाउंटर दर्ज किए गए हैं. इनमें 924 संदिग्ध मारे गए, जबकि सिर्फ दो पुलिसकर्मी मारे गए और 36 घायल हुए. यह आंकड़ा पूरे 2024 में पंजाब और सिंध में कुल 341 मौतों से कहीं अधिक है.
रिपोर्ट में बहावलपुर की जुबैदा बीबी के परिवार की दर्दनाक कहानी केंद्र में है. नवंबर 2025 में अपराध नियंत्रण विभाग ने उनके घर पर छापा मारा, मोबाइल, नकदी, सोना और बेटी का दहेज लूट लिया तथा उनके तीन बेटों इमरान (25), इरफान (23), अदनान (18) और दो दामादों को ले गई.
अगले 24 घंटों में अलग-अलग जिलों में "एनकाउंटर" में पांचों की मौत हो गई. परिवार ने ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान को बताया कि वे लाहौर तक पुलिस के पीछे गए और रिहाई की गुहार लगाई, लेकिन अगली सुबह खबर मिली कि पांचों मारे जा चुके हैं. पति अब्दुल जब्बार ने कहा कि उनके बेटे कोई अपराधी नहीं थे, बल्कि मेहनतकश, शादीशुदा और बच्चों के पिता थे.
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान की निदेशक फराह जिया ने कहा कि पंजाब में 1960 के दशक से एनकाउंटर की संस्कृति रही है, जहां पुलिस को यातना और हत्या की छूट मिलती रही. अपराध नियंत्रण विभाग को मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ ने अप्रैल 2025 में गंभीर और संगठित अपराध रोकने के लिए बनाया था, ताकि "सेफ पंजाब" का सपना पूरा हो.
लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, यह एक "समांतर पुलिस बल" बन गया है, जो बिना जवाबदेही के काम कर रहा है.
रिपोर्ट में एनकाउंटर की एक समान स्क्रिप्ट का जिक्र है: संदिग्ध मोटरसाइकिल पर "संदिग्ध" तरीके से रात में या चेकपॉस्ट पर जाते हैं, पुलिस पर पहले गोली चलाते हैं, पुलिस जवाबी कार्रवाई में उन्हें मार देती है, जबकि साथी भाग जाते हैं. कई एफआईआर में एक जैसी भाषा और वाक्यांश हैं, जैसे घायल संदिग्ध मरने से पहले अपना नाम, पता और अपराध इतिहास बता देता है. पुलिस के व्हाट्सएप ग्रुप में जारी मीडिया रिलीज भी लगभग एक जैसे होते हैं.
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान ने कहा कि परिवारों को शव तुरंत दफनाने के लिए मजबूर किया जाता है, पोस्टमॉर्टम नहीं होने देता. कई मामलों में कानूनी याचिका दायर करने पर परिवार को धमकियां मिलती हैं.
सरकार का पक्ष: पंजाब पुलिस और अपराध नियंत्रण विभाग ने दावा किया है कि इस "इंटेलिजेंस-ड्रिवन" मॉडल से संपत्ति संबंधी अपराध 60% से अधिक घटे हैं, डकैती से जुड़ी हत्याएं भी कम हुई हैं.
उन्होंने ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान के आरोपों को बेबुनियाद बताया. लेकिन ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान का कहना है कि अपराध कम होना अच्छा है, लेकिन तरीका महत्वपूर्ण है, न्यायिक प्रक्रिया से नहीं तो सारांश हत्या से.
मानवाधिकार कार्यकर्ता असद जमाल और रिदा होसैन ने इसे औपनिवेशिक और तानाशाही की विरासत बताया, जहां राज्य हिंसा को सामान्य बनाता है. उन्होंने चेतावनी दी कि आज "अपराधी" कहकर मारे जा रहे हैं, कल असहमति जताने वाले या निर्दोष भी निशाना बन सकते हैं.
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान ने उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है. पूर्व पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि न्याय व्यवस्था की कमजोरी और राजनीतिक दबाव एनकाउंटर को बढ़ावा देते हैं.
पिछले दशक में पूरे पाकिस्तान में लगभग 5,000 एनकाउंटर हुए, जिनमें पंजाब में करीब 2,000 थे. 2024 में पंजाब में यह संख्या अचानक 1,008 हो गई. विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर फोरेंसिक, कम्युनिटी पुलिसिंग और अभियोजन पर निवेश की बजाय शॉर्टकट अपनाना लंबे समय में खतरनाक साबित होगा.