पाकिस्तान: फंड की कमी से कैंसर उपचार ठप, दांव पर हजारों जिंदगियां
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्वास्थ्य सेवाओं पर गहराता आर्थिक संकट अब मासूम जिंदगियों के लिए काल बन रहा है. प्रांत में सरकारी फंड की भारी कमी के कारण कैंसर उपचार का महत्वपूर्ण कार्यक्रम पूरी तरह ठप होने की कगार पर है.
स्थिति इतनी गंभीर है कि सरकारी खजाने में पैसे न होने की वजह से जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति रुक गई है, जिससे हजारों पंजीकृत कैंसर मरीजों का भविष्य अधर में लटक गया है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स, खैबर टीचिंग अस्पताल और अयूब टीचिंग अस्पताल जैसे प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं का नया स्टॉक पिछले कई महीनों से नहीं पहुंचा है.
खैबर टीचिंग अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि वहां वर्तमान में स्टॉक शून्य है, जिससे 600 से अधिक मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं. वहीं, एबटाबाद के अयूब टीचिंग अस्पताल में अंतिम बार दिसंबर में दवाएं आई थीं, जो अब खत्म हो चुकी हैं.
स्वास्थ्य सचिव शाहिदुल्लाह खान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (2025-26) के लिए इस फ्लैगशिप प्रोग्राम हेतु 1500 मिलियन पाकिस्तानी रुपये की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार ने अब तक केवल 820 मिलियन रुपये ही आवंटित किए हैं. 680 मिलियन रुपये का यह विशाल घाटा ही दवाओं की आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है.
स्वास्थ्य विभाग अब अन्य मदों से धन हस्तांतरित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस समाधान नहीं निकला है.
संकट केवल सरकारी कोष तक सीमित नहीं है. पाकिस्तान के थोक बाजारों में दवाओं की कीमतों में 50% से लेकर 500% तक की बेतहाशा वृद्धि हुई है.
कैंसर के साथ-साथ मधुमेह और उच्च रक्तचाप की दवाएं भी आम जनता की पहुंच से बाहर हो गई हैं.
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कैंसर के उपचार में एक छोटा सा अंतराल भी मरीज के लिए 'डेथ वारंट' साबित हो सकता है, खासकर उनके लिए जो तीसरे या चौथे चरण में हैं. नागरिक समाज का आरोप है कि सरकारी उदासीनता और बेकाबू मुद्रास्फीति ने गरीब मरीजों को मौत के मुहाने पर खड़ा कर दिया है.