सोना न खरीदने की अपील के बाद पीएमओ से मिलेंगे संगठन
नई दिल्ली । डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील किए जाने के बाद भारतीय आभूषण बाजार और इससे जुड़ी कंपनियों के शेयरों में हड़कंप मच गया है. रविवार को दिए गए प्रधानमंत्री के इस बयान का असर सोमवार को शेयर बाजार पर साफ देखा गया, जहां टाइटन, सेनको गोल्ड और कल्याण ज्वेलर्स जैसी दिग्गज आभूषण कंपनियों के शेयरों में 6 से 9 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई.
प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा और अनावश्यक खपत को कम करने के उद्देश्य से यह आह्वान किया था, लेकिन इसने उद्योग जगत के भीतर आयात शुल्क में संभावित वृद्धि की चिंताओं को जन्म दे दिया है.
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार, बाजार को यह डर सता रहा है कि सरकार सोने के आयात को हतोत्साहित करने के लिए सीमा शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी कर सकती है, जो पिछले वर्षों के उच्चतम स्तर को भी पार कर सकती है.
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच आभूषण संघों के प्रतिनिधि मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारियों से मुलाकात करने वाले हैं. ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में सरकार की चिंताओं को स्वीकार करते हुए आगाह किया कि बिना किसी संरचनात्मक विकल्प के मांग को सीधे प्रभावित करने से पूरा ज्वेलरी इकोसिस्टम तबाह हो सकता है.
अरोड़ा ने जोर देकर कहा कि समाधान मांग को खत्म करने में नहीं, बल्कि घरेलू स्तर पर सोने के परिसाइकिल और बेकार पड़े सोने को अर्थव्यवस्था के मुख्य प्रवाह में लाने में निहित है.
महासंघ ने चेतावनी दी है कि उपभोक्ता भावना में अचानक आए इस नकारात्मक बदलाव से छोटे कारीगरों और ज्वैलर्स की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है, जो इस आपूर्ति श्रृंखला के सबसे संवेदनशील हिस्से हैं.
भारत की इस आर्थिक चिंता के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी है. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक होने के नाते, भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे देश के भुगतान संतुलन पर भारी दबाव पड़ रहा है.
आंकड़ों के अनुसार, 1 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब डॉलर गिरकर 690.693 अरब डॉलर रह गया है.
इसके अलावा, भारतीय रुपया सोमवार को डॉलर के मुकाबले 95.31 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. हालांकि, बाजार में व्याप्त आशंकाओं के बीच सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि फिलहाल सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने की कोई योजना नहीं है, लेकिन 2024 में शुल्क में की गई कटौती (15% से घटाकर 6%) के पलटने का डर अभी भी व्यापारियों के मन में बना हुआ है.
सरकार की ओर से ईंधन संरक्षण, वर्क फ्रॉम होम और यात्रा पर नियंत्रण जैसे अन्य उपाय भी सुझाए गए हैं ताकि बढ़ते व्यापार घाटे को नियंत्रित किया जा सके. भारतीय संस्कृति में सोने का महत्व शादियों और निवेश के लिहाज से अत्यंत अधिक है, ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पीएमओ के साथ होने वाली बैठक में उद्योग को कितनी राहत मिल पाती है.