ऑपरेशन सिंदूर: चीन का मध्यस्थता का दावा भारत ने पहले ही नकारा था
बीजिंग/नई दिल्ली । डेस्क: चीन के विदेश मंत्री के दावे कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में उनके देश ने मध्यस्थता की थी को भारत ने नकार दिया है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को साल 2025 की समीक्षा करते हुए दावा किया कि बीजिंग ने इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान उपजे तनाव को कम करने के लिए "मध्यस्थता" की थी.
बीजिंग में आयोजित एक संगोष्ठी में वांग यी ने भारत-पाकिस्तान तनाव को उन हॉटस्पॉट मुद्दों की सूची में शामिल किया, जिन्हें चीन ने अपने प्रयासों से सुलझाया. बता दें कि इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई अवसरों पर दावा किया था कि उन्होंने ही भारत-पाक युद्ध को रुकवाया है. अब इस सूची में चीन का भी नाम जुड़ गया है.
हालांकि, नई दिल्ली ने पहले ही स्पष्ट किया था कि 7-10 मई के बीच हुए इस संघर्ष का समाधान दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच हुई सीधी बातचीत से निकाला गया था.
गौरतलब है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया था कि 10 मई की दोपहर को हुई फोन कॉल के जरिए संघर्ष विराम की शर्तों पर सहमति बनी थी और भारत इस मामले में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करता है.
इस विवाद के बीच चीन की भूमिका पर गंभीर सवाल भी उठे हैं, विशेषकर पाकिस्तान को प्रदान की गई सैन्य सहायता को लेकर भारत ने कड़ी आलोचना की है.
भारतीय सेना के उप-प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने चीन पर संघर्ष को "लाइव लैब" की तरह इस्तेमाल करने और पाकिस्तान के जरिए भारत को नुकसान पहुँचाने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया था.
हालांकि, वांग यी ने इन विवादों के इतर भारत-चीन संबंधों में "अच्छी गति" का हवाला दिया और अगस्त में आयोजित एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी का भी जिक्र किया.
चीन ने एक तरफ जहां पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति जारी रखी, वहीं दूसरी तरफ वह खुद को एक शांतिदूत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, जिसे भारत ने अपनी संप्रभुता और द्विपक्षीय समाधान की नीति के खिलाफ बताया है.