दारा सिंह की समय से पहले रिहाई की याचिका ओडिशा सरकार ने खारिज की
भुवनेश्वर । डेस्क: ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों की जिंदा जलाकर हत्या करने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रबींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह की समय से पहले जेल से रिहाई की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिर गया है. सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद ओडिशा के राज्य सजा समीक्षा बोर्ड (SSRB) ने उसकी समय से पहले रिहाई की अर्जी को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.
बोर्ड का मानना है कि यदि दारा सिंह को इस समय जेल से रिहा किया गया, तो क्षेत्र में गंभीर सांप्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की पूरी आशंका है.
जेल प्रशासन और केंदुझर जेल अधिकारियों ने दारा सिंह के अच्छे आचरण का हवाला देते हुए उसकी रिहाई की सिफारिश की थी. हालांकि, 31 अगस्त 2026 को हुई बोर्ड की बैठक में केंदुझर जिला प्रशासन की उस रिपोर्ट पर ध्यान दिया गया, जिसमें 15 अगस्त 2026 को केंदुझर जिला जेल के बाहर दारा सेना से जुड़े 200 से 250 लोगों के जमावड़े और भड़काऊ नारेबाजी का जिक्र था.
बोर्ड ने इन सामाजिक दुष्परिणामों और जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल रिहाई से इनकार कर दिया है.
यह मामला 22 जनवरी 1999 का है, जब ओडिशा के केंदुझर जिले के मनोहरपुर गांव में एक वैन के भीतर सो रहे ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों-फिलिप (10 वर्ष) और तिमोती (6 वर्ष)-को भीड़ ने जिंदा जला दिया था. हमलावरों ने स्टेन्स पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया था. इस बर्बर हत्याकांड की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई थी.
दारा सिंह पिछले 26 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद है. 2003 में निचली अदालत ने उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उड़ीसा उच्च न्यायालय ने उम्रकैद में बदल दिया था. उच्चतम न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था. दारा सिंह दो अन्य हत्याओं के मामलों में भी उम्रकैद की सजा काट रहा है. इससे पहले भी 2016, 2019, 2020 और 2022 में उसकी रिहाई की याचिकाओं को लगातार खारिज किया जा चुका है.