US में 'नो किंग्स' विरोध प्रदर्शन: ट्रंप सरकार पर तानाशाही का आरोप
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के प्रमुख शहरों में शनिवार को हजारों प्रदर्शनकारियों ने 'नो किंग्स' आंदोलन के तहत मार्च निकाले और रैलियां कीं. ये विरोध ट्रंप प्रशासन पर तानाशाही की ओर बढ़ने का आरोप लगाते हुए हुए, जिसमें सरकारी सेवाओं पर लॉकआउट और सैन्य तैनाती को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया गया.
न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर से लेकर बोस्टन, अटलांटा, शिकागो, वाशिंगटन और लॉस एंजिल्स तक सड़कें 'रेजिस्ट फासिज्म' और 'प्रोटेस्टिंग इज पैट्रियॉटिक' जैसे नारों से गूंज उठीं. प्रदर्शनकारियों ने बैंड, इन्फ्लेटेबल फ्रॉग कॉस्ट्यूम्स और अमेरिकी संविधान की प्रतियां लेकर उत्सव जैसा माहौल बनाया. पोर्टलैंड में फ्रॉग प्रतीक प्रतिरोध का चिह्न बन चुका है.
इराक युद्ध के दिग्गज शॉन हॉवर्ड ने पहली बार विरोध में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा, "मैंने विदेशों में चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन अब अमेरिका में ही सिविल संघर्ष की आशंका दिख रही है."
सैन फ्रांसिस्को में सैकड़ों ने बीच पर 'नो किंग!' लिखवाया, जबकि साल्ट लेक सिटी में जून में मारे गए प्रदर्शनकारी को श्रद्धांजलि दी गई.
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज पर खुद को 'किंग' बताने वालों का खंडन किया और फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में फंडरेजर में व्यस्त रहे. रिपब्लिकन पार्टी ने इन्हें 'हेट अमेरिका' रैलियां कहा, लेकिन अधिकांश जगह शांतिपूर्ण रही. न्यूयॉर्क पुलिस ने कोई गिरफ्तारी नहीं की.
यह ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद तीसरा बड़ा आंदोलन था, जो शक्ति संतुलन पर सवाल उठा रहा है.