नीतीश कुमार को 'महिला शक्ति' ने दिलाई शानदार जीत
नई दिल्ली । डेस्क: बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार को राजनीतिक पटल पर एक बार फिर मजबूती से स्थापित कर दिया है. व्यापक रूप से राजनीतिक अप्रासंगिकता के कगार पर माने जा रहे नीतीश कुमार ने इस चुनाव में अपना दूसरा सर्वश्रेष्ठ चुनावी परिणाम हासिल किया है. उनकी इस वापसी का श्रेय मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना को जाता है, एक ऐसी नीति जिसे ठीक उस समय तैयार किया गया जब उनके मुख्यमंत्री की कुर्सी बरकरार रखने को लेकर अटकलें ज़ोरों पर थीं.
जेडी (यू) की जीत की कहानी दो पोस्टरों में सिमटी है. पहला, "25 से 30, फिर से नीतीश" था, जिसने पार्टी की चिंता के साथ-साथ उनके निर्विवाद नेता होने पर ज़ोर दिया. नतीजों से एक दिन पहले सामने आए दूसरे पोस्टर, "टाइगर अभी ज़िंदा है," ने चुनाव परिणाम के बाद अपनी पुष्टि कर दी.
यह वह समय था जब मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना की नींव डाली गई. इस योजना के तहत, नीतीश कुमार के प्रशासन ने जीविका के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क का उपयोग करते हुए, 1.21 करोड़ लाभार्थियों को एकमुश्त ₹10,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की. इस पर ₹12,100 करोड़ का खर्च आया, जो बिहार के वार्षिक बजट का लगभग 4% था.
इस योजना को 26 सितंबर को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था, और 6 अक्टूबर को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हुई. यह कदम एक जुआ था जो सफल रहा. इस योजना ने जाति की दीवारों को तोड़ते हुए महिला मतदाताओं को एकजुट किया और जेडी (यू) और एनडीए को अपेक्षित लाभ पहुँचाया.
जेडी (यू) एकमात्र पार्टी रही जिसकी वोट हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई 2020 में 15.39% से बढ़कर 19.03% हो गई. यह प्रदर्शन 2010 के बाद नीतीश कुमार का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. चुनाव आयोग के अनंतिम डेटा के अनुसार, इस चुनाव में 2.51 करोड़ महिला मतदाताओं ने वोट डाला.
जेडी (यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी. त्यागी ने कहा, "जेडी (यू) के प्रदर्शन का श्रेय केवल मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना को देना सरलीकरण होगा. लोगों ने नीतीश कुमार के अनुभव, स्वच्छ छवि, सुशासन, कानून व्यवस्था और प्रगति के लिए वोट दिया." त्यागी ने महिला-केंद्रित अन्य योजनाओं जैसे पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण (2006) और बिहार पुलिस में 35% आरक्षण (2007) का भी उल्लेख किया.
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के छह दिन बाद, 12 अक्टूबर को, एनडीए ने अपनी सीट-बंटवारे के फार्मूले को अंतिम रूप दिया. इस बार, दोनों पार्टियों ने बराबर यानी 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा. इसके बाद से, नीतीश कुमार के कड़े रुख और पार्टी पर उनके दृढ़ नियंत्रण की खबरें सामने आईं, जिसने नतीजों से पहले ही "टाइगर अभी ज़िंदा है" के दावे को मज़बूती दी.