बंगाल में निपाह वायरस के मामले, नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में अलर्ट
काठमांडू । डेस्क: भारत के पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के संदिग्ध मामलों की खबरों के बाद नेपाल में भी स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. एपिडेमियोलॉजी एंड डिजीज कंट्रोल डिवीजन ने कहा है कि घातक वायरस के संभावित प्रसार को देखते हुए सभी संबंधित एजेंसियों को अलर्ट किया जाएगा.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निपाह वायरस की मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है.
डिवीजन ने मंगलवार को संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा की और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों (आईएचआर) के तहत आधिकारिक सूचना का इंतजार करने का निर्णय लिया.
अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल से लगी नेपाल की कोशी प्रदेश सीमा पर रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है, जिससे संक्रमण के फैलने का खतरा बना हुआ है.
भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के कल्याणी स्थित एम्स की वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब में निपाह वायरस के कम से कम दो संदिग्ध मामलों की पुष्टि हुई है. संक्रमित मरीज स्वास्थ्यकर्मी बताए जा रहे हैं और उनकी हालत गंभीर है.
डॉक्टरों का कहना है कि निपाह एक जूनोटिक वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है. यह संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क, उनके मांस के सेवन या फिर मानव से मानव में शारीरिक स्रावों के जरिए भी फैल सकता है. फल खाने वाले चमगादड़ इसके प्रमुख वाहक माने जाते हैं, जो भारत-नेपाल सीमा पार आसानी से आ-जा सकते हैं.
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि काकड़भिट्टा सहित सभी प्रमुख सीमा नाकों और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर बने हेल्थ डेस्क को सतर्क कर दिया जाएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि निपाह के लक्षण कोविड-19 जैसे होते हैं, लेकिन इसमें मरीज की हालत बहुत तेजी से बिगड़ती है, जिससे गलत निदान का खतरा बढ़ जाता है.
निपाह वायरस की पहचान पहली बार 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में हुई थी. भारत में 2001 में पश्चिम बंगाल में सबसे घातक प्रकोप दर्ज किया गया था, जिसमें 66 संक्रमितों में से 45 की मौत हुई थी. 2018 से 2025 के बीच केरल में इसके कई प्रकोप सामने आए. करीब 19 साल बाद पश्चिम बंगाल में वायरस के फिर से उभरने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है.
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि निपाह वायरस बेहद घातक है और फिलहाल इसका कोई विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है. मरीजों को केवल लक्षणों के आधार पर उपचार दिया जाता है. निपाह का ऊष्मायन काल 4 से 14 दिन का होता है और इसके लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, दौरे, सांस की तकलीफ और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याएं शामिल हैं.