छत्तीसगढ़ का 'वेटलैंड मित्र' मॉडल को NGT ने पड़ोसी राज्यों को भी अपनाने को कहा
नई दिल्ली । डेस्क: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आर्द्रभूमियों (wetlands) के संरक्षण के लिए शुरू की गई "वेटलैंड मित्र" पहल की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बताया है. 3 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस शेओ कुमार सिंह और सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने न केवल अपने राज्य में आर्द्रभूमियों के चिन्हांकन और सीमांकन का कार्य पूरा कर लिया है, बल्कि स्थानीय लोगों को 'वेटलैंड मित्र' के रूप में जोड़कर एक प्रभावी निगरानी तंत्र भी खड़ा किया है.
ट्रिब्यूनल ने मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार को भी निर्देश दिया है कि वे छत्तीसगढ़ की इस सफल कार्यप्रणाली को अपने यहाँ लागू करने पर विचार करें, ताकि आर्द्रभूमियों की वास्तविक स्थिति की सटीक जानकारी सीधे अधिकारियों तक पहुँच सके और अतिक्रमण व प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके.
एनजीटी ने मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में जल निकायों पर बढ़ते अतिक्रमण और गंदे पानी के बहाव से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की.
छत्तीसगढ़ के मॉडल का उल्लेख करते हुए बेंच ने स्पष्ट किया कि 'वेटलैंड मित्र' आर्द्रभूमियों पर नजर रखने वाली 'आंख' की तरह काम करेंगे, जिससे नियमों का उल्लंघन होने पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी.
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश और राजस्थान के अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर जल निकायों के संरक्षण, सीमांकन और पिलर लगाने की स्थिति पर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है.
साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि यदि उपचारित किए बिना गंदा पानी तालाबों या वेटलैंड्स में छोड़ा गया, तो संबंधित अधिकारियों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली की जाएगी और उन पर मुकदमा भी चलाया जाएगा. मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को तय की गई है.
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ ने आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए एक बेहद सक्रिय और वैज्ञानिक मॉडल अपनाया है, जिसके तहत राज्य ने अपने लगभग 35,534 वेटलैंड्स का डिजिटल डेटा तैयार कर उनका सीमांकन कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता 'वेटलैंड मित्र' अभियान है, जिसमें 18,000 से अधिक स्थानीय नागरिकों को स्वैच्छिक रूप से जोड़कर एक जमीनी निगरानी तंत्र खड़ा किया गया है, जो अतिक्रमण और प्रदूषण की सीधी जानकारी प्रशासन तक पहुँचाते हैं.
इसके साथ ही, राज्य ने 6,200 से अधिक जल निकायों के लिए विशिष्ट 'हेल्थ कार्ड' जारी किए हैं और 'वूमेन फॉर वेटलैंड्स' जैसे कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को संरक्षण के नेतृत्वकारी कार्यों से जोड़ा है.
बिलासपुर के कोपरा जलाशय को राज्य की पहली 'रामसर साइट' का दर्जा दिलाना और प्रवासी पक्षियों के रहवास की सुरक्षा सुनिश्चित करना छत्तीसगढ़ की इसी प्रतिबद्धता का परिणाम है, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि इस आदर्श मॉडल की ज़मीनी हालत को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं.