नए श्रम कानून लागू: कांग्रेस ने बताया मज़दूर अधिकारों पर सबसे बड़ा प्रहार
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार ने देश के श्रम परिदृश्य में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए चार नए लेबर कोड (श्रम संहिताओं) को पूरी तरह से लागू कर दिया है. सरकार द्वारा 8 और 9 मई, 2026 को जारी की गई राजपत्र सूचनाओं के साथ ही इन कानूनों के कार्यान्वयन की प्रक्रिया अब पूर्ण हो गई है.
इन चार संहिताओं- वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता को 29 पुराने और जटिल श्रम कानूनों को समाहित कर एक सरल और आधुनिक ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है.
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इन कानूनों के प्रभावी होने से देश के सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को सीधा लाभ मिलेगा.
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कदम का पुरजोर विरोध करते हुए इसे श्रमिक विरोधी बताया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक तीखी प्रतिक्रिया में आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने जानबूझकर विधानसभा चुनावों के संपन्न होने तक का इंतजार किया और फिर पिछले दरवाजे से इन "मजदूर विरोधी" कानूनों को अधिसूचित कर दिया.
खड़गे ने कहा कि ये नए नियम 'हायर एंड फायर' (भर्ती करो और निकालो) की संस्कृति को वैधानिक मान्यता देते हैं, जिससे रोजगार की सुरक्षा खत्म हो जाएगी और ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा.
उन्होंने यह भी दावा किया कि इन कानूनों के माध्यम से श्रमिकों के यूनियन बनाने और अपनी मांगें रखने के अधिकारों को सीमित कर दिया गया है, जो सीधे तौर पर उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने की कोशिश है.
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह अपने 'श्रमिक न्याय' एजेंडे के तहत एमजी नरेगा के विस्तार, ₹400 की राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी और सभी असंगठित श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज की मांग पर अडिग रहेगी.