इबोला का नया स्ट्रेन बेकाबू- WHO
नई दिल्ली । डेस्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयिसस ने चेतावनी दी है कि वर्तमान इबोला प्रकोप में अब तक 220 संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं. मामलों का पता लगाने में हुई देरी के कारण राहतकर्मी अब महामारी से पिछड़ रहे हैं और फिलहाल यह प्रकोप नियंत्रण से बाहर होता दिख रहा है.
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) के पड़ोसी देशों से तुरंत कदम उठाने की अपील की है. इस बीच, युगांडा में इबोला के दो नए मामलों की पुष्टि हुई है, जिससे वहां कुल संक्रमितों की संख्या सात हो गई है. ये दोनों नए मरीज राजधानी कंपाला के एक निजी अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी हैं.
डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में इबोला के इस दुर्लभ 'बुंडिबुग्यो' स्ट्रेन को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है. चिंता की बात यह है कि इस नए स्ट्रेन का कोई टीका या पुख्ता इलाज मौजूद नहीं है.
इस महामारी का मुख्य केंद्र कांगो का पूर्वोत्तर प्रांत इतूरी है, लेकिन अब यह वायरस 'ग्राउंड जीरो' से 200 किलोमीटर दूर तक फैल चुका है और सीमा पार युगांडा में भी दस्तक दे चुका है.
डब्ल्यूएचओ प्रमुख के अनुसार, निगरानी बढ़ाने के बाद कांगो में 900 से अधिक संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है. इबोला एक घातक वायरल बीमारी है जो शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलती है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव और अंग विफलता हो सकती है.
महामारी के बीच कांगो में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं. इतूरी प्रांत के मोंगब्व आलू जनरल अस्पताल में आक्रोशित युवाओं की भीड़ ने हमला कर दिया, जिसके बाद डॉक्टरों को मरीजों को सुरक्षित निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा. हमलावर अपने रिश्तेदारों के शव सौंपने की मांग कर रहे थे.
इससे पहले शनिवार को इसी इलाके में डॉक्टरों के बिना सीमा (MSF) के एक टेंट को आग लगा दी गई थी, जिससे 18 संदिग्ध मरीज लापता हो गए. स्थानीय प्रशासन ने संक्रमण रोकने के लिए सुरक्षित दफन प्रक्रिया अनिवार्य की है, जिसका पीड़ित परिवारों द्वारा विरोध किया जा रहा है. सरकार ने भीड़ पर नियंत्रण के लिए 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगा दिया है.