सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

नेपाल: प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ और पुलिसिया क्रूरता पर उठे सवाल

C

CG Khabar

13 जुल. 2026, 08:43 AM 4 मिनट में पढ़ें 4

बालेन्द्र शाह
बालेन्द्र शाह

काठमांडू । डेस्क: नेपाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है. हाल ही में काठमांडू के कीर्तिपुर में बाढ़ पीड़ित सुकुम्बासी (झुग्गी-झोपड़ी) समुदाय के प्रति एकजुटता दिखाने पहुंचे तीन युवा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और पुलिसिया मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस घटना के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज ने सरकार पर असहमति की आवाज को दबाने और पुलिस का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया है.


कीर्तिपुर में एकजुटता दिखाने गए 'जेन जेड' कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई


भारी बारिश के कारण कीर्तिपुर स्थित होल्डिंग सेंटर में जलभराव हो गया था, जहां विस्थापित सुकुम्बासी परिवारों को रखा गया था. इन प्रभावित लोगों की स्थिति जानने और उनके लिए एक गरिमापूर्ण पुनर्वास समाधान की मांग करने के लिए 'जेन जेड' समूह के कार्यकर्ता माजिद अंसारी, करिश्मा थापा और नेल्सन घटानी वहां पहुंचे थे. लेकिन, वहां पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

विज्ञापन


पेशा से कानूनी सलाहकार माजिद अंसारी ने जब पुलिस से गिरफ्तारी का वारंट मांगा, तो उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई. अंसारी ने अस्पताल के बिस्तर से आपबीती सुनाते हुए बताया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें पीछे से कॉलर पकड़कर खींचा और बेरहमी से पीटा, जिससे उनकी आंख के पास गहरी चोट आई और उनकी दृष्टि धुंधली हो गई. 


उन्हें लहूलुहान हालत में पहले कीर्तिपुर अस्पताल और फिर त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल ले जाया गया. वहीं, उनकी साथी करिश्मा थापा और नेल्सन घटानी को भी अपशब्द कहते हुए पुलिस वैन में डाल दिया गया और देर शाम इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे भविष्य में ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे.


विरोध की गूंज: मोरंग और हवाई अड्डे पर भी गिरफ्तारियां


इस घटना की आग काठमांडू से बाहर भी फैल गई. माजिद अंसारी की गिरफ्तारी के विरोध में मोरंग के जिला पुलिस कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना दे रहे २६ प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया. पुलिस का दावा था कि प्रदर्शनकारियों ने मुख्य द्वार को अवरुद्ध कर दिया था, जिसके कारण उन्हें हिरासत में लेना पड़ा. बाद में उन्हें भी लिखित प्रतिबद्धता के बाद छोड़ा गया.


इसी सिलसिले में, सरकार के मुखर आलोचक और कार्यकर्ता दुर्गा प्रसाई को त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही हिरासत में ले लिया गया. प्रसाई वहां सरकार के खिलाफ पत्रकारों से बात करने वाले थे. पुलिस ने सुरक्षा संवेदनशीलता का हवाला देते हुए कहा कि हवाई अड्डा एक प्रतिबंधित क्षेत्र है और वहां किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती.


लोकतंत्र में सिकुड़ती असहमति की जगह: विशेषज्ञों की चिंता


नेपाल में हाल के दिनों में सरकार या मंत्रियों की आलोचना करने पर आम नागरिकों और सोशल मीडिया प्रयोक्ताओं के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया जा रहा है. कुछ समय पहले प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री बनाने के आरोप में यूट्यूबर रोशन पोखरेल को इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन एक्ट के तहत जेल भेज दिया गया. 


वहीं, स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता को सोशल मीडिया पर 'माफिया मंत्री' कहने और उनके इस्तीफे की मांग करने वाले एक स्वास्थ्य कर्मी नबेश अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया.


राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व सदस्य कपिल श्रेष्ठ ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने एक संवेदनशील, समझदार और मानवाधिकारों का सम्मान करने वाली सरकार की उम्मीद में जनादेश दिया था, लेकिन वर्तमान सत्ता का व्यवहार इसके ठीक उलट है. 


उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सुकुम्बासी मुद्दे पर अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है. मानवाधिकार अधिवक्ता शोभाकर बुढाथोकी ने भी कहा कि नेपाल का संविधान नागरिकों को स्वतंत्र रूप से इकट्ठा होने और विचार व्यक्त करने का अधिकार देता है और पुलिस को अपनी सीमाओं के भीतर रहकर ही काम करना चाहिए.


पुलिस का पक्ष: कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता


इन तमाम आरोपों के बीच नेपाल पुलिस के आला अधिकारी अपनी कार्रवाई को जायज ठहरा रहे हैं. नेपाल पुलिस के प्रवक्ता और पुलिस उप महानिरीक्षक अबी नारायण काफ्ले ने स्पष्ट किया कि पुलिस केवल उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है जो सरकारी काम में बाधा डालते हैं, अशांति फैलाते हैं या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं. 


पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बेहद आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग होने पर साइबर ब्यूरो सक्रिय होता है और कानूनी दायरे में रहकर ही जांच की जाती है.


हालांकि, पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक हेमंत मल्ला ने चेतावनी दी है कि लोकतंत्र में सिर्फ सरकार से सवाल पूछने या उसकी आलोचना करने पर किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. उन्होंने फ्रंटलाइन पर तैनात पुलिसकर्मियों को जनता के बढ़ते गुस्से को देखते हुए अधिक संवेदनशील और संयमित व्यवहार करने की सलाह दी है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP