रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

नेपाल में Zen Z ने राजशाही की उम्मीदें तोड़ीं, पर बहस बरकरार

C

CG Khabar

18 सित. 2025, 12:33 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

सुशीला कार्की
सुशीला कार्की

काठमांडू । डेस्क: काठमांडू में जनरेशन Z के उग्र प्रदर्शनों ने न केवल राजनीतिक बदलाव को मजबूर किया, बल्कि राजशाही समर्थकों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया. फिर भी, प्रो-मोनार्की आवाजें चेतावनी दे रही हैं कि यदि जनता का असंतोष और गहराता है, तो ताज की वापसी की संभावना फिर से उभर सकती है.


पिछले हफ्ते नेपाल में गुस्से भरे प्रदर्शनों ने युवाओं को तत्कालीन प्रधानमंत्री को सत्ता से हटाने में सफलता दिलाई. 

विज्ञापन


इस दौरान 2008 में 449 साल पुरानी शाह वंश की समाप्ति के बाद निर्वासित पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की वापसी की अफवाहें भी जोर पकड़ने लगी थीं. 


हालांकि, यह राजशाही समर्थकों का एक क्षणिक सपना साबित हुआ. अब देश का नेतृत्व पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की संभाल रही हैं, न कि पूर्व राजा ज्ञानेंद्र. 


इस बदलाव ने नेपाल को फिर से राजशाही बनाने की कल्पना को करारा झटका दिया है.


नेपाल और इसके भू-राजनीति पर लेखन करने वाले 41 वर्षीय लेखक अमीश मुल्मी का कहना है, "युवाओं ने राजशाही की वापसी की कोई इच्छा नहीं दिखाई. उनका गुस्सा गणतांत्रिक व्यवस्था में बार-बार सत्ता में आने वाले नेताओं और पार्टियों के खिलाफ था." 


जनरेशन Z के पास अभी कोई एकजुट नेतृत्व नहीं है, लेकिन उनके प्रदर्शन ने एक वैकल्पिक राजनीतिक विचारधारा को बल दिया है-राजशाही समर्थकों का गठबंधन, जो गणतांत्रिक नेताओं की जगह एक संवैधानिक राजशाही स्थापित करना चाहता है.


इस साल मार्च में राजशाही समर्थकों ने पूर्व राजा की वापसी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था, जिसे राज्य पुलिस ने बलपूर्वक दबा दिया. इस हिंसा में एक प्रो-रॉयलिस्ट प्रदर्शनकारी की मौत हो गई, कम से कम 70 लोग घायल हुए, और कई को हिरासत में लिया गया. 


राष्ट्रीय राजतंत्र पार्टी के महासचिव और नेपालगंज के पूर्व मेयर धवल शमशेर राणा का कहना है कि राजा "देश को एकजुट रखने का प्रतीक" हैं. वे एक संवैधानिक राजशाही की वकालत करते हैं, जिसमें हिंदू धर्म को राज्य धर्म का दर्जा मिले. राणा का मानना है कि ऐतिहासिक रूप से "हर कोई राजा को राष्ट्र का नेता मानता था," और यह एकता का एक मजबूत बंधन था.


राणा स्वीकार करते हैं कि जनरेशन Z ने राजशाही की बहाली की मांग नहीं की. वे लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं और पूर्ण राजशाही की जगह संवैधानिक राजशाही चाहते हैं. 


2022 के संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी का पांचवां स्थान हासिल करना राजशाही के लिए एक झटका था. फिर भी, राणा भविष्य की संभावनाओं पर नजर रखे हुए हैं. उनका मानना है कि अगले चुनावों के बाद यदि मुख्य राजनीतिक दल जनरेशन Z के खिलाफ "प्रतिवक्रांति" शुरू करते हैं, तो जनता में असंतोष फिर से बढ़ सकता है. 


राणा कहते हैं, "यह वह बिंदु होगा जब राजशाही एक विकल्प के रूप में उभर सकती है." नेपाल में गणतंत्र और राजशाही के बीच यह बहस अभी खत्म नहीं हुई है और भविष्य में यह फिर से जोर पकड़ सकती है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP