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नेपाल फ्लैश फ्लड: 160 की मौत, 403 लापता, 142 भारतीयों का सुराग नहीं

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27 अग. 2026, 02:35 AM 4 मिनट में पढ़ें 4

नेपाल फ्लैश फ्लड
नेपाल फ्लैश फ्लड

काठमांडू । डेस्क: नेपाल के उत्तरी पर्वतीय इलाके और चीन के तिब्बत की सीमा पर बुधवार को आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अब तक कम से कम 160 लोगों की जान जा चुकी है. अकेले नेपाल के इलाकों से अब तक 157 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि सीमा पार तिब्बत के गीरोंग काउंटी में 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. इस कुदरती आफत में सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 142 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. बाढ़ की विभीषिका इतनी भयानक थी कि नदी किनारे बसे कई गांव, बाजार, सड़कें और पुल पूरी तरह से बह गए.


पर्यटकों और सुरक्षाकर्मियों पर भी टूटा आफत का पहाड़


आपदा के बाद से नेपाल में भ्रमण पर आए पर्यटकों का बड़ा समूह संपर्क से बाहर है. नेपाल के पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, करीब 403 पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 341 विदेशी नागरिक शामिल हैं. लापता विदेशियों में सबसे अधिक संख्या भारतीय नागरिकों की है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, मलेशिया, नीदरलैंड, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के नागरिक भी आपदा की चपेट में आने के बाद से लापता हैं. नेपाल पुलिस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि राहत और बचाव कार्य में जुटे 28 पुलिसकर्मी भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए हैं और उनका कोई अतापता नहीं है.

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तिब्बत सीमा पर भी तबाही, चीन में 265 से ज्यादा लापता


नेपाल से लगे तिब्बत के गीरोंग क्षेत्र में भी इस फ्लैश फ्लड का बहुत गहरा असर पड़ा है. चीनी अधिकारियों और वहां के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार, गीरोंग पोर्ट के पास हुए बड़े भूस्खलन और कीचड़ के बहाव के कारण कम से कम 265 लोग लापता हैं. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही, संभावित द्वितीयक आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणालियों को और अधिक मजबूत करने को कहा है.


प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह की अपील और राहत कार्य की चुनौतियां


नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने स्थिति की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की आपातकालीन बैठक बुलाई. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए देशवासियों से धैर्य बनाए रखने और एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार सभी प्रभावितों के रेस्क्यू, इलाज, भोजन और आवास की पूरी जिम्मेदारी ले रही है. हालांकि, रसुवा जिले के सयाप्रू बेसी और तिमुरे जैसे बेहद प्रभावित इलाकों में पानी का स्तर बहुत अधिक होने की वजह से सेना के हेलीकॉप्टरों को उतरने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल, रेडक्रॉस और स्काउट्स की टीमें धरातल पर लगातार राहत अभियानों में जुटी हुई हैं.


बिजली ढांचा ध्वस्त और भारत के बिहार में अलर्ट जारी


इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को करारा झटका दिया है. नेपाल बिजली प्राधिकरण के अनुसार, पनबिजली और सौर ऊर्जा परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचने से लगभग 430 मेगावाट उत्पादन क्षमता ठप्प हो गई है. इस वजह से प्रभावित इलाकों में बिजली, टेलीकॉम और सड़क संपर्क पूरी तरह से कट गया है. उधर, नेपाल से आने वाली नदियों के रौद्र रूप को देखते हुए भारत के बिहार राज्य में भी खतरा मंडराने लगा है. नेपाल की भोटे कोशी नदी का पानी आगे चलकर त्रिशूली और फिर भारत में गंडक नदी का रूप ले लेता है. संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए बिहार प्रशासन ने 6 निचले जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर तटीय इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है.


ग्लेशियर और हिमस्खलन बना तबाही की वजह


नेपाल में यह फ्लैश फ्लड बिना किसी भारी बारिश के अचानक आया, जिससे लोग संभल भी नहीं पाए. जलवायु वैज्ञानिकों और इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की तरफ किसी ग्लेशियर में चट्टान और बर्फ के भारी हिमस्खलन के कारण ल्हेंदे खोला नदी का प्रवाह अस्थायी रूप से रुक गया था. बाद में जब यह प्राकृतिक बांध टूटा, तो पानी का प्रचंड सैलाब भोटे कोशी नदी में तबाही मचाता हुआ नीचे की ओर बह निकला. वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में इस तरह की चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता लगातार बढ़ रही है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP