NCLT ने सुभाष चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना पर लगाई रोक
नई दिल्ली । डेस्क: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने ज़ी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में 25 अगस्त के अपने ही आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. इस आदेश के तहत चंद्रा द्वारा पेश की गई पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी गई थी. हालांकि, ट्रिब्यूनल ने पाया कि पूर्व में इस मामले की सुनवाई करने वाले सदस्यों के बीच कोई स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया था, जिसके बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है.
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने सुभाष चंद्रा को अपनी किसी भी संपत्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बेचने या स्थानांतरित (एलियनेट) करने से भी रोक दिया है. इसके साथ ही मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं.
यह विवाद इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड द्वारा सुभाष चंद्रा के खिलाफ इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 95 के तहत शुरू की गई व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही से जुड़ा है.
चंद्रा ने ट्रिब्यूनल के समक्ष कुल 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के बदले महज 6.25 करोड़ रुपये के पुनर्भुगतान का प्रस्ताव रखा था. इसके अलावा, दिवालियापन प्रक्रिया के खर्च के लिए 25 लाख रुपये की अलग से पेशकश की गई थी.
मामले में गतिरोध तब उत्पन्न हुआ जब पूर्व में सुनवाई कर रही दो सदस्यीय पीठ के न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी ने एक-दूसरे के विपरीत फैसले दिए. भारद्वाज केवल सहमति देने वाले लेनदारों के लिए योजना को मंजूरी देने के पक्ष में थे, जबकि पुरी ने पूरी प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.
इसके बाद मामला तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा के पास भेजा गया, जिन्होंने 25 अगस्त को योजना को मंजूरी देते हुए इसे सभी लेनदारों पर बाध्यकारी करार दिया.
जब यह मामला वापस दो सदस्यीय पीठ के सामने पहुंचा, तो यह स्पष्ट हुआ कि तीनों सदस्यों के विचार एक-दूसरे से पूरी तरह अलग थे और कोई सर्वसम्मति या बहुमत नहीं बन सका था. इस उलझन के बाद मामले को NCLT अध्यक्ष को भेजा गया, जिन्होंने इस 5 सदस्यीय पीठ का गठन किया. अब ट्रिब्यूनल इस पूरे व्यक्तिगत दिवालियापन मामले पर नए सिरे से सुनवाई करेगा.