नक्सलवाद: 2010 के मुकाबले हिंसा में 88% की भारी गिरावट
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को संसद में देश में वामपंथी उग्रवाद की स्थिति पर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए बताया कि भारत अब नक्सल मुक्त होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2010 की तुलना में 2025 में नक्सली हिंसा की घटनाओं में 88 प्रतिशत की जबरदस्त कमी दर्ज की गई है.
जहां 2010 में हिंसा की 1936 घटनाएं हुई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या सिमटकर केवल 234 रह गई है.
भाजपा सांसद रूपकुमारी चौधरी के एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि सुरक्षा बलों और नागरिकों की मृत्यु दर में भी 90 प्रतिशत की गिरावट आई है.
साल 2010 में नक्सली हिंसा में 1005 लोगों की जान गई थी, जबकि 2025 में यह आंकड़ा घटकर 100 पर आ गया है.
सुरक्षा बलों की मुस्तैदी का आलम यह है कि केवल एक साल (2025) में ही 364 नक्सलियों को ढेर किया गया और 1022 को गिरफ्तार किया गया, जबकि 2337 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया.
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, नक्सलवाद का भौगोलिक प्रभाव भी अब बेहद सीमित हो गया है. 2010 में जहां 465 पुलिस स्टेशनों में हिंसा की खबरें आती थीं, अब केवल 119 पुलिस स्टेशन ही इससे प्रभावित हैं.
वर्तमान में देश के केवल 8 जिले नक्सल प्रभावित बचे हैं, जिनमें से 6 छत्तीसगढ़ में, 1 झारखंड में और 1 ओडिशा में है. 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' जैसे बड़े अभियानों ने माओवादी नेतृत्व की कमर तोड़ दी है. सरकार का लक्ष्य 31 मार्च, 2026 तक पूरे भारत को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना है.