नारायणपुर: उफनती पहाड़ी नदी में बह गईं दो मासूम बेटियां, 18 से अधिक मकान ध्वस्त
नारायणपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में कुदरत के कहर ने ग्रामीणों की जिंदगी भर की कमाई पल भर में तिनके की तरह बहा दी. नारायणपुर के अबुझमाड़ क्षेत्र स्थित ब्रेहबेड़ा गांव में 28 और 29 जुलाई की दरमियानी रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद पहाड़ों से आए तेज पानी के बहाव ने भीषण तबाही मचाई है. इस प्राकृतिक आपदा में जहां 17 से 18 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए, वहीं दो मासूम बहनें उफनते नाले के तेज बहाव में बह गईं.
राहत एवं बचाव कार्य के दौरान एक लड़की का शव बरामद कर लिया गया है, जबकि दूसरी की तलाश अभी भी जारी है.
पीड़ित पिता सोनू राम ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया कि सब कुछ महज कुछ ही मिनटों में खत्म हो गया. आंखों के सामने ही उनकी बेटियां पानी के तेज थपेड़ों में समा गईं और वे उन्हें बचा नहीं सके. उनके पास अब न तो रहने को छत बची है और न ही सिर छुपाने का कोई सहारा.
ग्रामीणों के अनुसार, 29 जुलाई की रात करीब 10 बजे बारिश शुरू हुई थी, जिसे पहले सामान्य माना गया. लेकिन देर रात 3 बजे तक पहाड़ों से पानी का इतना खतरनाक सैलाब आया कि जिसने रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर दिया. लोग अपनी जान बचाने के लिए पेड़ों पर चढ़ गए तो कुछ ने जंगलों की ओर भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई.
इस बाढ़ ने केवल कच्चे मकानों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति बहाल होने के बाद 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PMAY) के तहत बने पक्के मकानों को भी ध्वस्त कर दिया. गांव में वर्षों पुरानी विरासत 'घोटुल' और पुराने स्कूल की इमारत के बिखरे मलबे इस आपदा के भयानक मंजर की गवाही दे रहे हैं.
फिलहाल, जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर डटी हुई हैं. प्रभावित परिवारों को सूखा राशन, कंबल और रोजमर्रा के सामान बांटे जा रहे हैं, वहीं नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.