मुंबई धमाकों के दोषी अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की अर्जी खारिज
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मुख्य दोषियों में से एक, गैंगस्टर अबू सलेम की समय से पहले जेल से रिहाई की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. सलेम ने शीर्ष अदालत में गुहार लगाई थी कि जेल में उसके अच्छे व्यवहार को देखते हुए उसकी सजा की अवधि में 3 साल 16 दिन की कटौती की जानी चाहिए.
याचिकाकर्ता का दावा था कि यदि उसे यह छूट मिलती है, तो वह तत्काल जेल से रिहाई का हकदार बन जाएगा. हालांकि, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजीव मेहता की पीठ ने सलेम के आपराधिक इतिहास और टाडा (TADA) के तहत उसकी संलिप्तता को देखते हुए इस अर्जी को स्वीकार करने योग्य नहीं माना.
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अबू सलेम जैसे गंभीर अपराधों के दोषी को इस तरह की विशेष रियायत नहीं दी जा सकती. हालांकि, पीठ ने सलेम को यह विकल्प दिया है कि वह अपनी इस मांग को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख कर सकता है.
इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी पिछले साल जुलाई में यह टिप्पणी की थी कि सलेम की सजा की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है. जेल विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक सलेम ने अपनी सजा के केवल 19 साल 5 महीने और 18 दिन ही पूरे किए हैं.
उल्लेखनीय है कि 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए 12 सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था, जिसमें 257 निर्दोष लोगों की जान गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे. अबू सलेम लंबे समय तक फरार रहा था, जिसके बाद उसे साल 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था.
प्रत्यर्पण के समय भारत सरकार ने पुर्तगाल को यह आश्वासन दिया था कि उसे 25 साल से अधिक की सजा नहीं दी जाएगी, जो कि साल 2030 में पूरी होने वाली है. इसके अलावा, उसे 2015 में बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है. सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद अब सलेम को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा.