मोनिका 25 साल बाद भारत प्रत्यर्पित
नई दिल्ली । डेस्क: आर्थिक धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में वांछित मोनिका कपूर को 25 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अमरीका से भारत प्रत्यर्पित किया गया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 9 जुलाई 2025 को उन्हें दिल्ली लाया. मोनिका 1999 में अपने दो बच्चों के साथ भारत से अमरीका भाग गई थीं, जब उनके खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के जरिए शुल्क-मुक्त सोना आयात करने का मामला सामने आया था.
2010 में उनके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था.
मोनिका कपूर पर अपने दो भाइयों, रजन और राजीव खन्ना, के साथ मिलकर गहरी साजिश रचने का आरोप है. उनकी कंपनी, मोनिका ओवरसीज, ने 1998 में फर्जी शिपिंग बिल, इनवॉइस और बैंक प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर 2.36 करोड़ रुपये का शुल्क-मुक्त सोना आयात किया.
इस धोखाधड़ी से केंद्र सरकार को उस समय 2 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 5 करोड़ रुपये है. मोनिका ने इन फर्जी दस्तावेजों के जरिये छह नवीनीकृत लाइसेंस का दुरुपयोग किया और इन्हें अहमदाबाद की एक कंपनी डीप एक्सपोर्ट्स को बेच दिया.
सीबीआई ने 2002 में इस वित्तीय घोटाले की जांच नये सिरे से शुरू की और 2004 में अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें मोनिका और उनके भाइयों को मुख्य आरोपी बनाया गया.
2006 में मोनिका को भगोड़ा घोषित किया गया, और 2017 में उनके भाई रजन और राजीव को दिल्ली की एक अदालत ने दोषी ठहराया. 2010 में मोनिका के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था.
भारत-अमरीका प्रत्यर्पण संधि के तहत 2010 में मोनिका के प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध किया गया था, लेकिन कानूनी अड़चनों और मोनिका के दावों जिनमें उन्होंने भारत में राजनीतिक उत्पीड़न की आशंका जताई थी के कारण यह प्रक्रिया 14 साल तक लटकी रही.
न्यूयॉर्क की यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ने अंततः उनकी याचिका खारिज कर दी. इस साल मई में अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके प्रत्यर्पण पर अस्थायी रोक लगाई थी, लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय के अनुमोदन के बाद यह रोक हटा ली गई.
9 जुलाई को सीबीआई की एक टीम मोनिका को बुधवार रात की उड़ान से भारत लेकर आई. उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की पांच धाराओं के तहत धोखाधड़ी और व्यापारिक घोटाले के आरोप दर्ज हैं.
सीबीआई ने एक बयान में कहा, "मोनिका कपूर का प्रत्यर्पण आर्थिक अपराधों के खिलाफ हमारी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है. हम यह सुनिश्चित करने के लिये प्रतिबद्ध हैं कि भारत में हुए वित्तीय अपराधों के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाये."
मोनिका के भारत लौटने के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है. यह मामला भारत में आर्थिक अपराधों और अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण की जटिलताओं को उजागर करता है.