मोदी ट्रंप की मुलाकात भारत के लिए घाटे का सौदा ?
मोदी ट्रंप की मुलाकात भारत के लिए कितना फायदेमंद साबित हुआ
नई दिल्ली | डेस्कः प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका से लौट रहे हैं और इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि आखिर मोदी की अमेरिकी यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ.
मोदी के अमेरिका पहुंचने से पहले ही ट्रंप ने साफ किया कि हम टैरिफ़ बढ़ायेंगे चाहे कोई भी देश हो.
डॉलर की मार झेल रहे रुपये के लिए अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने की बात करना भारत के लिए असुविधाजनक है. ट्रंप जबसे राष्ट्रपति बने हैं वह खुलकर दुनिया को चेतावनी दे रहे हैं और सिर्फ अमेरिका के फायदे को देख रहे हैं.
मोदी की मुलाकात से ट्रंप के तेवर में थोड़ी सी भी नरमी देखने को नहीं मिली. उनकी बातों से स्पष्ट है कि वह भारत को सिर्फ एक बाजार के रूप में देख रहे हैं. उनको भारत के हितों से कोई मतलब नहीं है.
दोनों नेताओं ने प्रेस वार्ता में तेल-गैस, डिफ़ेंस, टैरिफ़, टेक्नोलॉजी और व्यापार पर बात की.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह और मोदी इस सहमति पर पहुंचे हैं, जो अमेरिका को भारत का नंबर वन तेल और गैस आपूर्तिकर्ता देश बना सकता है.
ट्रंप का कहना है कि यह भारत के साथ 45 अरब डॉलर के अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने की योजना का हिस्सा है.
ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्षों ने कुल रक्षा साझेदारी को बढ़ाने का निर्णय लिया है. ट्रंप ने 2025 से ही भारत को रक्षा बिक्री बढ़ाने की बात की और कहा, "हम भारत को कई अरब डॉलर की रक्षा बिक्री करेंगे.
हम भारत को एफ़-35 स्टील्थ फ़ाइटर जेट मुहैया कराने का तरीक़ा तलाशेंगे."
मुंबई हमले के साज़िशकर्ता तहव्वुर राना को भारत प्रत्यर्पित किए जाने का ज़िक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, "यह एलान करते हुए मुझे ख़ुशी हो रही है कि हमारे प्रशासन ने दुनिया के सबसे बुरे व्यक्तियों में से एक के प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दे दी है."
उन्होंने कहा, "उन्हें अब भारत में क़ानूनी कार्यवाही का सामना करने के लिए भेजा जाएगा. हम उन्हें तत्काल प्रभाव से भारत को सौंप रहे हैं और हमारे पास कुछ आवेदन और आए हैं और कुछ अन्य लोगों को प्रत्यर्पित किया जाएगा."
मुंबई 2008 चरमपंथी हमले से कथित तौर पर जुड़े तहव्वुर हुसैन राना को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किए जाने की इजाज़त देने के लिए मोदी ने ट्रंप को धन्यवाद दिया.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बयान जारी करते हुए कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के अनुचित और बहुत कड़े टैरिफ़ को घटाने की घोषणा की है, जो भारतीय बाज़ार में अमेरिकी पहुंच को कम करते हैं. और मैं कहना चाहूंगा कि यह बहुत बड़ी समस्या है. "
ट्रंप ने भारत से होने वाले आयात को लेकर कहा, भारत जो भी हम पर शुल्क लगाता है, हम भी उतना ही शुल्क उस पर लगाएंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत-अमेरिकी सहयोग में सकारात्मक प्रगति की बात कही.
उन्होंने कहा, "अमेरिकी परमाणु उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि मिली है. अमेरिकी न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के भारतीय बाज़ार में जगह देने के लिए भारत नियमों में सुधार ला रहा है."
इस मुलाक़ात में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच व्यापार पर खुली चर्चा की पेशकश की है और अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों को वापस लेने की बात भी कही है.
इसके पहले जब भारतियों को हथकड़ी और जंजीर लगाकर अमेरिकी सैन्य विमान से भारत भेजा गया था तो काफी हंगामा हुआ था.
विपक्ष कह रहा था कि मोदी अमेरिका जाकर इस मुद्दे पर बात करेंगे कि भारतीय नागरिकों के साथ अमानवीय व्यवहार न हो लेकिन मोदी अबैध प्रवासी मुद्दे पर अमेरिका की हां में हां मिलाते दिखे. उन्होंने भारतीय नागरिकों के अपमान पर अपने संबोधन में कोई बात नहीं कही.
मोदी द्विपक्षीय व्यापार और संबंधों मजबूत किए जाने की बात की.
इस बार की मुलाकात में ट्रंप पूरी तरह से मोदी पर दबाव डालते नजर आये. आगे आने वाला समय बतायेगा कि अमेरिका को लेकर भारत की क्या रणनीति रहती है.
यह चर्चा का विषय रहा कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में दोनो नेताओं के बीच जो गर्मजोशी देखी गयी थी वह नदारद रही.