मनरेगा मजदूरी : 10 सालों में 94 रुपए बढ़ी
छत्तीसगढ़ में मनरेगा मजदूरी पिछले 10 सालों में मात्र 94 रुपए बढ़ी
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में मनरेगा मजदूर पर्याप्त मजदूरी नहीं मिलने से नाराज हैं. सरकार द्वारा इस साल इन मजदूरों के पारिश्रमिक में मात्र 18 रुपए की बढ़ोतरी की गई है. जो पिछले वर्ष की तुलना में 4 रुपए कम है.
जबकि पिछले 10 वर्षों में इनकी पारिश्रमिक दर में महज 94 रुपए का इजाफा हुआ है.
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी यानी मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को पर्याप्त मजदूरी नहीं मिलने से उनका मन काम करने से भंग हो रहा है.
इसी वजह से मनरेगा में काम करने वाले सक्रिय मजदूरों की संख्या में कमी आई है. पुरूष मजदूरों की संख्या तो नहीं के बरारबर है.
हालांकि लगभग सभी ग्रामीण गरीब मजदूर अपना जॉबकार्ड तो बनवा रखे हैं, मगर नियमित काम में नहीं जाते हैं.
कुछ मजदूर तो ऐसे भी हैं जब उनके पास कोई काम नहीं होता तब मनरेगा की ओर रूख करते हैं.
ऐसे मजदूरों की संख्या भी बहुतायत मात्रा है, जो 100 दिन का रोजगार भी पूरा नहीं करते.
कम मजदूरी के चलते पलायन
मनरेगा में काम तो मिलता है लेकिन मजदूरी काफी कम मिलने से काफी मजदूर दूसरे प्रांतों में पलायन कर जाते हैं.
मनरेगा में काम नहीं करने की एक वजह यह भी है. हालांकि शासकीय दस्तावेजों में पलायन करने वाले मजदूरों की संख्या न के बराबर है.
जबकि प्रदेश से हजारों की संख्या में मजदूर रोजगार की तलाश में हर साल दूसरे प्रांत जाते हैं.
यहां के मजदूर खरीफ फसल की कटाई के बाद पलायन करते हैं. चार माह काम करने के बाद फिर वापस लौट आते हैं.
पलायन करने वाले मजदूरों का कहना है कि दूसरे प्रांतों में प्रतिदिन करीब 500 से 1000 रुपए तक मजदूरी मिल जाती है. जबकि यहां उतनी मजदूरी नहीं मिल पाती.
हालांकि अधिक मजदूरी की चाहत में कई मजदूर धोखे का शिकार भी होते हैं और दूसरे प्रांतों में बंधक बन जाने की भी खबरें आती हैं. जिसका खामिजाया भी उन्हें भुगतना पड़ता है.
उम्मीद से काफी कम बढ़ी मजदूरी
दरअसल मनरेगा मजदूरों को इस बार उम्मीद थी कि कम से कम उनके पारिश्रमिक में 25 से 30 रुपए की बढ़ोतरी होगी.
लेकिन सरकार ने तो पिछले साल के मुकाबले इस बार मजदूरी दर बढ़ाने के बजाय कटौती कर दी. पिछले साल पारिश्रमिक में 22 रुपए का इजाफा हुआ था.
इस बार सरकार ने उसमें 4 रुपए कटौती कर मात्र 18 रुपए की मामूली बढोतरी की है. इससे मजदूरों की उम्मीद टूट गई.
शासन द्वारा दर तय की गई नई मजदूरी दर 1 अप्रैल से लागू हो गई है.
इस बढ़ोतरी के बाद अब राज्य की मनरेगा मजदूरों की मजदूरी दर 261 रुपए प्रतिदिन हो गई है. जो कि आज के समय में काफी कम है.
इन दिनों प्रदेश में पीएम आवास निर्माण काफी तेज गति से चल रहा है. जिन मजदूरों का पीएम आवास स्वीकृत हुआ है उनकी राशि भी उसमें जुड़ती है.
मजदूर अपने ही घर में निर्माणाधीन घर में काम करते हैं और उसकी मजदूरी मनरेगा में भरा जाता है. इसी वजह से इन दिनों मनरेगा के मानव दिवस में काफी उछाल आ गया है.
कब कितना बढ़ी मजदूरी
पिछले 19 साल में मनरेगा मजदूरी में सिर्फ 199 रुपए की बढ़ोतरी हुई है. साल 2006-07 में मनरेगा मजदूरी दर 62.63 रुपए थी. वर्ष 2010 में यह 100 रुपए हुई.
इसके बाद साल 2013-14 में महिला व पुरुष श्रमिकों को समान रूप से 146 रुपए दिया जाता था. इसके बाद साल 2014-15 में इसमें 11 रुपए की बढोतरी कर 157 रुपए किया गया.
इसके बाद साल 2015-16 में तो मात्र दो रुपए की वृद्धि की गई. इस प्रकार 159 रुपए हुआ.
साल 2016-17 में 8 रुपए की बढ़त के साथ 167 रुपए किया गया.
इसके बाद वर्ष 2017-18 में जब मजदूरी दर 5 रुपए बढ़ाई गई तब एक दिन की कुल मजदूरी 172 रुपए तक पहुंची. इसके बाद के दो साल का आंकड़ा तो काफी निराशा जनक रहा.
दोनों साल लगातार दो-दो रुपए की बढ़ोतरी की गई. इस प्रकार वर्ष 2018-19 में 172 रुपए और वर्ष 2019-20 में 176 रुपए मजदूरी मिली.
वर्ष 2020-21 में 14 रुपए की वृद्धि के साथ कुल मजदूरी 190 रुपए तक पहुंची.
इसके बाद कोरोनाकाल के ठीक बाद वर्ष 2021-22 में केंद्र सरकार ने मनरेगा के श्रमिकों की मजदूरी में सिर्फ 3 रुपए का इजाफा कर नयी मजदूरी दर 193 रुपए निर्धारित की.
फिर 2022-23 में 11 रुपए की वृद्धि हुई, तब जाकर दो सौ का आंकड़ा पार हुआ. इस साल सभी श्रमिकों को 204 रुपए की दर से भुगतान किया गया.
इसके अगले वर्ष 2023-24 में 17 रुपए पारिश्रमिक बढ़ाया गया. तब मजदूरी दर 221 रुपए तक पहुंची.
बीते साल 2024-25 में मनरेगा मजदूरी में सबसे ज्यादा 22 रुपए की बढ़ोतरी की गई. तब जाकर प्रतिदिन की मजदूरी 243 रुपए तक पहुंची.
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में नई मनरेगा मजदूरी दर प्रतिदिन 261 रुपए तय की गई है.