शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

गर्भपात के लिए नाबालिग की हाईकोर्ट में याचिका

C

CG Khabar

17 जुल. 2026, 10:56 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

गर्भपात
गर्भपात

बिलासपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक नाबालिग लड़की ने अनचाहे गर्भ के गर्भसमापन (एमटीपी) की अनुमति मांगते हुए याचिका दायर की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़िता का स्वास्थ्य परीक्षण कराने का निर्देश दिया है. साथ ही मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट 20 जुलाई 2026 तक हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा गया है.


याचिका के अनुसार, रायपुर जिले की रहने वाली नाबालिग को एक युवक ने प्रेम संबंध का भरोसा दिलाकर शादी का झांसा दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया. घटना के बाद लड़की गर्भवती हो गई. पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.


हालांकि, आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद नाबालिग की गर्भावस्था की समस्या का समाधान नहीं हो सका. इसी कारण उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए गर्भसमापन की अनुमति देने की मांग की. याचिका में इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का भी हवाला दिया गया है.


सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कहा गया कि किसी भी आदेश से पहले पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण आवश्यक है. दोनों पक्षों की दलीलों और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने नाबालिग को अपने वैधानिक अभिभावक के माध्यम से 17 जुलाई 2026 को रायपुर सीएमएचओ के समक्ष मेडिकल परीक्षण के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया.


अदालत ने सीएमएचओ को निर्देश दिया कि स्त्रीरोग विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए. यह बोर्ड परीक्षण कर बताएगा कि गर्भसमापन सुरक्षित रूप से किया जा सकता है या नहीं और इससे नाबालिग के जीवन अथवा स्वास्थ्य पर किसी गंभीर जोखिम की आशंका है या नहीं. रिपोर्ट में गर्भसमापन की चिकित्सकीय संभावना, उससे जुड़े जोखिम और संभावित शारीरिक प्रभावों का भी उल्लेख किया जाएगा.


पीड़िता की गोपनीयता और सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश


हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान पीड़िता की पहचान और गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रखी जाए. परिवार की सहमति से एक वयस्क महिला सदस्य की उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ यह भी निर्देश दिया गया कि जांच के दौरान पीड़िता को किसी प्रकार की असुविधा न हो. अदालत ने सीएमएचओ को परिवहन सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और परीक्षण के बाद नाबालिग को सुरक्षित रूप से उसके अभिभावक के साथ वापस भेजने के निर्देश भी दिए हैं.


हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट 20 जुलाई 2026 तक या उससे पहले अदालत में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है. रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही याचिका पर आगे की सुनवाई की जाएगी और गर्भसमापन की अनुमति संबंधी मांग पर निर्णय लिया जाएगा.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP