MGNREGA घोटाला: छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में अनियमितताएं
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी एक हालिया ऑडिट रिपोर्ट ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के कार्यान्वयन में भारी भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है. अप्रैल 2025 से नवंबर 2025 के बीच केवल आठ महीनों की जांच में देशभर के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 55 जिलों में लगभग 302 करोड़ रुपये की वित्तीय धांधली पकड़ी गई है.
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 11.14 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है. ऑडिट के दौरान यह पाया गया कि कई स्थानों पर काम केवल कागजों पर हुआ, जबकि धरातल पर कोई निर्माण कार्य अस्तित्व में ही नहीं था.
छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले से आई रिपोर्ट बताती है कि वहां के पसौरी पंचायत में ग्रामीणों के पास जॉब कार्ड तो हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से उन्हें कोई काम नहीं मिला है.
इसके उलट, कई राज्यों में 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और यहां तक कि मृत व्यक्तियों के नाम पर भी भुगतान किए जाने के मामले सामने आए हैं.
जांच रिपोर्ट में अधिकारियों, ठेकेदारों और बैंक प्रबंधकों के बीच एक गहरे गठजोड़ का पर्दाफाश हुआ है. जांच में पाया गया कि निगरानी से बचने के लिए बड़ी परियोजनाओं को जानबूझकर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया ताकि निचले स्तर पर ही उनकी मंजूरी ली जा सके.
बिहार के भागलपुर जिले की एक ही पंचायत में लगभग 20 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां काम के नाम पर केवल साइनबोर्ड लगाए गए थे और राशि का बंदरबांट कर लिया गया.
इसी तरह, मध्य प्रदेश के झाबुआ में 2017 में मृत हो चुके व्यक्ति के नाम पर 2020 में भुगतान निकाला गया, जिसकी जांच अब लोकायुक्त पुलिस कर रही है.
झारखंड में बिचौलियों द्वारा बकरी शेड योजना में लाभार्थियों से कमीशन लेने और उत्तर प्रदेश में मस्टर रोल में नाम होने के बावजूद कार्यस्थल से मजदूरों के गायब होने जैसी घटनाएं आम पाई गईं.
इन बढ़ती अनियमितताओं के बीच, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि व्यापक भ्रष्टाचार के कारण ही अब इस योजना को 'विकसित भारत G RAM G' के रूप में पुनर्गठित किया गया है, जिसके तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 कर दिया गया है.
सरकार ने दावा किया है कि आधार सीडिंग, जियो-टैगिंग और 100 प्रतिशत डिजिटल भुगतान (Aadhaar Payment Bridge System) के माध्यम से अब भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है, हालांकि ऑडिट रिपोर्ट की रिकवरी स्थिति दर्शाती है कि 302.45 करोड़ रुपये की कुल अनियमितता में से अब तक 293.43 करोड़ रुपये वसूल किए जा चुके हैं.