UPI पर MDR चार्ज: स्टैंडिंग कमेटी में नहीं हुई कोई चर्चा- गौरव गोगोई
नई दिल्ली । डेस्क: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लागू किए जाने के हालिया फैसले को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए दावा किया है कि वित्त संबंधी संसद की स्थायी समिति (पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी) में इस नीति पर कोई चर्चा ही नहीं की गई थी. गोगोई ने सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की पुरजोर अपील की है.
सोश मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी बात रखते हुए गोगोई ने कहा कि जब वित्त विभाग के प्रतिनिधियों ने स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों से मुलाकात की थी, तब उनके पास MDR चार्जेस को लेकर ऐसा कोई स्पष्ट प्रस्ताव मौजूद नहीं था. उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान जब सांसदों ने सवाल उठाए, तो सरकार के प्रतिनिधि इस नए शुल्क की जरूरत को लेकर कोई ठोस या संतोषजनक जवाब नहीं दे सके.
कांग्रेस सांसद ने इस नीति के असर पर चिंता जताते हुए कहा कि यह नया फैसला छोटे भारतीय व्यापारियों, दुकानदारों और नए उद्यमियों को नुकसान पहुंचाएगा, जबकि इसका सीधा फायदा बड़ी अमेरिकी कंपनियों को मिलेगा.
गौरतलब है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक सर्कुलर जारी कर 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट्स पर 0.4% MDR शुल्क लगाने की घोषणा की है. यह शुल्क अधिकांश व्यापारियों को उन UPI भुगतानों पर बैंकों और पेमेंट प्रोसेसर्स को देना होगा जो प्रति लेनदेन 2,000 रुपये से ज्यादा के होंगे.
दूसरी ओर, वित्त समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने स्पष्ट किया कि बैठक में कुछ सांसदों द्वारा यह मुद्दा जरूर उठाया गया था और इसे समिति की अगली बैठक में चर्चा के लिए शामिल किया जा सकता है.
व्यापारियों और आम लोगों को राहत देते हुए इस नियम में कुछ छूट भी दी गई हैं. व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन और छोटे विक्रेताओं को दिए जाने वाले भुगतानों पर यह शुल्क लागू नहीं होगा.
इसके अलावा, UPI या रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड के जरिए 2,000 रुपये तक के सभी पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पूरी तरह से टैक्स फ्री रहेंगे. वहीं रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि से जुड़े क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर अधिकतम 5 रुपये का फ्लैट MDR तय किया गया है.