माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा झारखंड से गिरफ्तार
रांची । डेस्क: झारखंड में सुरक्षा बलों ने नक्सल विरोधी अभियान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के शीर्ष नेता और सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था 'पोलित ब्यूरो' के सदस्य मिसिर बेसरा को दो अन्य वरिष्ठ सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है. मिसिर बेसरा पर सरकार ने 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. यह संयुक्त कार्रवाई झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और कोबरा (CoBRA) बटालियन द्वारा धनबाद और गिरिडीह जिलों के सीमावर्ती इलाके में मंगलवार देर रात अंजाम दी गई.
इस विशेष अभियान के दौरान बेसरा के अलावा माओवादी संगठन के क्षेत्रीय समिति के दो सदस्य मेहनत उर्फ मोछू और विभीषण मुर्मू उर्फ गौरव/सौरभ को भी दबोचा गया. इन दोनों पर 15-15 लाख रुपये का इनाम दर्ज था. इनके साथ दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.
इस बड़ी गिरफ्तारी की पटकथा रांची में 16 नक्सलियों द्वारा किए गए सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद लिखी गई. आत्मसमर्पण करने वालों में बेसरा का पूर्व बॉडीगार्ड देवन मुर्मू उर्फ शनिचरवा शामिल था. देवन से मिली सटीक और गुप्त सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर जाल बिछाया और इस खूंखार नक्सली कमांडर को धर दबोचा.
गिरिडीह जिले के पीरटांड का निवासी मिसिर बेसरा पिछले चार दशकों से माओवादी संगठन में सक्रिय था और उसे भास्कर, सुनिर्मल तथा सागर जैसे कई छद्म नामों से जाना जाता था. उसके खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में हत्या, सुरक्षा बलों पर हमले, आईईडी विस्फोट और रंगदारी जैसे 150 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं.
वर्ष 2007 में खूंटी पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद वह 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर हुए माओवादी हमले के दौरान पुलिस हिरासत से फरार हो गया था, जिसके बाद से वह लगातार देश के सबसे वांछित नक्सलियों में शामिल था.
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, संगठन के शीर्ष नेतृत्व की यह गिरफ्तारी झारखंड में माओवादी तंत्र के लिए एक कमर तोड़ने वाला झटका है. फिलहाल सभी गिरफ्तार नक्सलियों से गुप्त स्थान पर गहन पूछताछ जारी है, जिससे उनके वित्तीय स्रोतों, हथियारों के ठिकानों और बचे हुए नेटवर्क का पर्दाफाश होने की उम्मीद है.