महुआ मोइत्रा ने तीन अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम बंगाल के कृष्णनगर से तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक विशेषाधिकार हनन नोटिस भेजकर नादिया जिले के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. सांसद का आरोप है कि 14 अगस्त की देर रात कृष्णनगर स्थित सरकारी सर्किट हाउस में उन्हें अनुचित तरीके से कमरा खाली करने का दबाव बनाकर उनके संसदीय विशेषाधिकारों का हनन किया गया और सुरक्षा से समझौता किया गया. लोकसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के नियम 222 के तहत भेजे गए इस नोटिस में नादिया के जिलाधिकारी श्रीकांत पल्ली, अतिरिक्त जिलाधिकारी नृपेंद्र सिंह और नज़ारेथ डिप्टी कलेक्टर अनामिका बेरा को नामजद किया गया है.
रात के वक्त अचानक कमरा खाली करने का फरमान
सांसद महुआ मोइत्रा के अनुसार, वह मॉनसून सत्र के समापन के बाद 14 अगस्त को शाम लगभग 6:15 बजे अपने संसदीय क्षेत्र कृष्णनगर के नादिया सर्किट हाउस पहुंची थीं. वहां नियमानुसार उन्हें कक्ष आवंटित किया गया और रात में भोजन भी परोसा गया. हालांकि, रात 9:47 बजे अतिरिक्त जिलाधिकारी ने उन्हें फोन करके तुरंत सर्किट हाउस खाली करने को कहा. जब उन्होंने अचानक दिए गए इस निर्देश का कारण पूछा, तो अधिकारी ने केवल इतना कहा कि 'ऊपर से आदेश आए हैं'. इसके बाद रात 10:52 बजे डिप्टी कलेक्टर ने उन्हें व्हाट्सएप पर 12 अगस्त की तारीख का एक प्रशासनिक आदेश भेजा, जिसमें रखरखाव और सफाई का हवाला देकर सर्किट हाउस को अस्थायी रूप से बंद करने की बात कही गई थी.
प्रशासनिक तर्क पर उठे गंभीर सवाल
महुआ मोइत्रा ने पूरे मामले में प्रशासनिक नीयत और प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने तर्क दिया कि यदि 12 अगस्त को ही सर्किट हाउस के निलंबन का आदेश जारी हो चुका था, तो 14 अगस्त को चेक-इन के समय उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई. इसके अलावा, उस समय सर्किट हाउस में नज़ारेथ डिप्टी कलेक्टर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर और एक आईएएस प्रोबेशनर समेत कई अन्य सरकारी अधिकारी पहले से ठहरे हुए थे. सांसद का कहना है कि वहां कोई बड़ा रखरखाव कार्य नहीं चल रहा था और रसोई तथा अन्य सेवाएं पूरी तरह चालू थीं. ऐसे में रात के समय बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के किसी महिला जनप्रतिनिधि को बाहर जाने पर मजबूर करना प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है.
संसदीय प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्था में चूक
गृह मंत्रालय के 'ऑर्डर ऑफ प्रेसिडेंस' का हवाला देते हुए सांसद ने स्पष्ट किया कि सांसदों को 21वें स्थान पर रखा गया है और अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्हें सरकारी आवास का पूर्ण अधिकार होता है. जब तक उनसे उच्च वरीयता वाला कोई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित न हो, उन्हें वहां से नहीं हटाया जा सकता. सांसद ने यह भी मुद्दा उठाया कि जिस वक्त उन्हें बाहर जाने को कहा गया, उसी समय इमारत के बाहर भीड़ जमा होकर नारेबाजी कर रही थी. सर्किट हाउस का यह इलाका पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी के आधिकारिक आवासों के ठीक सामने स्थित एक उच्च-सुरक्षा क्षेत्र है, जहां भीड़ का जुटना प्रशासनिक ढिलाई और सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है.
स्पीकर से हस्तक्षेप और समिति को मामला सौंपने की अपील
सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि इस नोटिस का तुरंत संज्ञान लेते हुए मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए. साथ ही अंतरिम उपाय के तौर पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को निर्देश जारी करने की मांग की गई है ताकि उन्हें भविष्य में अपने संसदीय क्षेत्र के दौरों के दौरान सर्किट हाउस सहित सभी निर्धारित प्रोटोकॉल और सुविधाएं निर्बाध रूप से मिल सकें. गौरतलब है कि महुआ मोइत्रा ने हाल के दिनों में अपने क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों और कथित लक्षित घटनाओं के संदर्भ में पुलिस प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं.