महानदी जल विवाद को ओडिशा के महाधिवक्ता ने बताया 'राजनीतिक', BJD ने किया पलटवार
भुवनेश्वर । डेस्क: ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने महानदी जल विवाद को एक 'राजनीतिक विवाद' करार देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह विवाद अदालत के बाहर बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा. आचार्य ने भुवनेश्वर में आगामी राष्ट्रीय मध्यस्थता सम्मेलन के संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि महानदी जल विवाद को बातचीत के माध्यम से अदालत के बाहर सुलझाया जा सकता है, और ओडिशा सरकार इस दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है.
उन्होंने कहा, "भारत के इतिहास में कोई भी जल ट्रिब्यूनल विवाद को सुलझाने में सफल नहीं रहा है. पिछली सरकार ने प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करके इस विवाद पर 33 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला."
आचार्य ने इसे एक "कृत्रिम विवाद" बताते हुए कहा कि इसे राजनीतिक रूप से हल किया जाना चाहिए, न कि कानूनी तरीकों से. उन्होंने आगे कहा, "यदि वर्तमान सरकार इस विवाद को बातचीत के जरिए हल करने में सफल होती है, तो यह देश के इतिहास में अपनी तरह का पहला मामला होगा."
विपक्षी बीजद ने आचार्य के बयान की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह केवल राजनीतिक सनसनी फैलाने के लिए दिया गया है. बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने दावा किया, "इस तरह के बयान महाधिवक्ता के पद की गरिमा को कम करते हैं. महाधिवक्ता एक संवैधानिक पद है, और इस पद पर बैठे लोग आमतौर पर राजनीतिक बयानों से बचते हैं. आज का बयान स्पष्ट रूप से राजनीति से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य केवल पिछली सरकार पर दोषारोपण करना है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है."
मोहंती ने कहा कि यदि यह एक "कृत्रिम विवाद" था, तो ओडिशा में सरकार बदलने के बाद इसे हल करने में एक मिनट भी नहीं लगना चाहिए था, क्योंकि केंद्र और छत्तीसगढ़ में भी भाजपा सत्ता में है.
उन्होंने सवाल उठाया, "15 महीने बीत जाने के बाद भी यह मुद्दा क्यों अनसुलझा है? यह स्पष्ट करता है कि विवाद कृत्रिम नहीं है, और आचार्य का बयान केवल राजनीतिक उथल-पुथल पैदा करने के लिए था."
2018 से महानदी जल विवाद महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है.