महानदी जल विवाद: छत्तीसगढ़ दौरे पर जाएगी ओडिशा की सर्वदलीय टीम
भुवनेश्वर । डेस्क: ओडिशा सरकार की अंतर-दलीय समिति ने महानदी जल विवाद को लेकर आगामी 31 जनवरी और 1 फरवरी को छत्तीसगढ़ का दौरा करने का निर्णय लिया है. उप-मुख्यमंत्री के.वी. सिंह देव की अध्यक्षता में शनिवार को हुई दूसरी बैठक में यह तय किया गया कि समिति छत्तीसगढ़ सरकार के साथ जल बंटवारे पर राज्य का पक्ष रखेगी.
इससे पहले ओडिशा में, 23 जनवरी को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें राज्य के रुख को अंतिम रूप दिया जाएगा और आंदोलनकारी समूहों से भी परामर्श किया जाएगा.
सिंह देव ने बताया कि महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (MWDT) की अगली सुनवाई 7 फरवरी, 2026 को होनी है. क्योंकि ट्रिब्यूनल का कार्यकाल 13 मार्च को समाप्त हो रहा है और अब तक केवल एक गवाह का बयान दर्ज हो सका है.
इसलिए ओडिशा सरकार केंद्र से इसका कार्यकाल बढ़ाने का अनुरोध करेगी. बैठक में राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन सहित बीजद और कांग्रेस के प्रतिनिधि भी शामिल हुए.
ओडिशा सरकार का मानना है कि इस विवाद को राजनीतिक संवाद और बातचीत के जरिए सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया जाना चाहिए.
गौरतलब है कि महानदी जल विवाद मुख्य रूप से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच नदी के जल बँटवारे को लेकर है, जिसकी शुरुआत छत्तीसगढ़ द्वारा नदी के ऊपरी हिस्से में कई बैराजों और सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण से हुई.
ओडिशा का आरोप है कि इन निर्माणों के कारण गैर-मानसून महीनों में उसके यहाँ पानी का प्रवाह कम हो गया है, जिससे हीराकुंड बांध और राज्य की खेती व बिजली उत्पादन पर बुरा असर पड़ रहा है.
वहीं, छत्तीसगढ़ का तर्क है कि वह अपने भौगोलिक अधिकार के तहत केवल अपने हिस्से के पानी का उपयोग कर रहा है.
इस विवाद के कानूनी समाधान के लिए केंद्र सरकार ने मार्च 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (MWDT) का गठन किया था, जो वर्तमान में दोनों राज्यों के दावों की जाँच और सुनवाई कर रहा है.