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लेह में प्रदर्शन हिंसक हुआ: केंद्र ने सोनम वांगचुक पर लगाया आरोप

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25 सित. 2025, 12:34 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

लद्दाख में प्रदर्शन
लद्दाख में प्रदर्शन

लेह । डेस्क: लद्दाख की राजधानी लेह में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत शामिल करने की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन बुधवार, 24 सितंबर 2025 को हिंसक हो गया. जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) द्वारा समर्थित इस आंदोलन में कई लोगों की मौत और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान हुआ. 


केंद्र सरकार ने वांगचुक पर "उत्तेजक बयानों" के जरिए भीड़ को भड़काने का आरोप लगाया है, जबकि कार्यकर्ता ने हिंसा से खुद को अलग करते हुए इसे क्षेत्र के युवाओं का स्वतःस्फूर्त विद्रोह बताया है.


प्रदर्शन 10 सितंबर को वांगचुक द्वारा शुरू किए गए भूख हड़ताल के साथ शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, जैसे राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत आदिवासी दर्जा प्राप्त करना था. ये मांगें क्षेत्र की अनूठी सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान से जुड़ी हैं, जो चीन की सीमा से सटा हुआ है. 


2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद लद्दाख को बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था, जिसके बाद से ये मांगें जोर पकड़ रही हैं. मंगलवार को भूख हड़ताल में शामिल दो बुजुर्ग प्रदर्शनकारियों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद 14-25 आयु वर्ग के युवाओं की भारी भीड़ प्रदर्शन में शामिल हो गई, जिससे स्थिति बिगड़ गई.


केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अनुसार, "अराजक भीड़" ने वांगचुक के "अरब स्प्रिंग-शैली के प्रदर्शन" और "नेपाल में जेन-जेड विरोध" के उत्तेजक उल्लेखों से प्रेरित होकर सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसमें लगभग 30 पुलिसकर्मी घायल हो गए. भीड़ ने लेह में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यालय में आग लगा दी और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) के परिसर में तोड़फोड़ की. 


जवाब में, पुलिस को गोलीबारी का सहारा लेना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप कई लोगों की मौत हुई. लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने एक टेलीविजन संबोधन में मौतों की पुष्टि की, लेकिन सटीक संख्या नहीं बताई. उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू लागू करने की घोषणा की. गुप्ता ने बताया कि एक CRPF वाहन को कर्मियों सहित जलाने का प्रयास किया गया, और पुलिस महानिदेशक के वाहन पर भी पथराव हुआ.


गृह मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि सरकार लद्दाख की मांगों को लेकर लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेताओं के साथ एक उच्चस्तरीय समिति (HPC) के माध्यम से सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है. यह समिति, जो 2023 में गठित की गई थी और केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व में है, ने अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण को 45% से बढ़ाकर 84% करने, परिषदों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण प्रदान करने, और भोटी व पुर्गी को आधिकारिक भाषाओं के रूप में घोषित करने जैसे महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं. 


इसके अलावा, 1,800 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की गई है. लद्दाख के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ 26 सितंबर को दिल्ली में एक बैठक निर्धारित थी, लेकिन एक दिन पहले ही हिंसा भड़क गई, जिससे बातचीत की प्रक्रिया बाधित हो गई.


लद्दाख बौद्ध संघ के अध्यक्ष और लेह एपेक्स बॉडी के सह-संयोजक चेरिंग दोरजे लक्रूक ने बताया कि प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण था, जिसमें स्कूली छात्राएं और युवा शामिल थे. लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई. लक्रूक ने कहा, "हमने उन्हें शारीरिक रूप से रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गया." 


हिंसा के बाद, वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी. एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि किसी को भी इस तरह की हिंसा की आशंका नहीं थी. उन्होंने युवाओं के आक्रोश को "जेन-जेड उन्माद" करार देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी किसी की नहीं सुन रहे थे और यहां तक कि गोलियों से भी नहीं डरे. वांगचुक ने सरकार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को विफल करने और युवाओं को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाया.


इस बीच, कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने लेह एपेक्स बॉडी और उनकी मांगों के समर्थन में गुरुवार को बंद का आह्वान किया है. यह हिंसा ऐसे समय में हुई है जब अगले महीने लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के चुनाव होने वाले हैं. 


2020 में BJP ने ये चुनाव जीते थे. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लद्दाख को 2019 में केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने पर उत्सव मनाया गया था, लेकिन अब लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP