जाने LPG, LNG, CNG, PNG क्या है?
नई दिल्ली । डेस्क: वैश्विक तनाव और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल रिफाइनरियों और पाइपलाइनों पर बढ़ते हमलों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
सरकार की नई नीति के तहत अब गैस आपूर्ति में अस्पतालों और घरेलू उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी ताकि आम जनजीवन और स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों. वितरण के नए खाके के अनुसार, उपलब्ध तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का 100% हिस्सा अब एलपीजी (LPG) उत्पादन, सीएनजी (CNG) और पाइप से आने वाली रसोई गैस (PNG) के लिए आरक्षित किया गया है.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए गैस-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन वर्तमान संकट ने विभिन्न ईंधनों की निर्भरता और उनके बीच के अंतर को समझना अनिवार्य कर दिया है:
एलपीजी (LPG): घरेलू रसोई की जीवन रेखा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी भारत के करोड़ों घरों में खाना पकाने का मुख्य साधन है. पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण सेल (PPAC) के अनुसार, भारत अपनी एलपीजी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी पहल ने इसकी पहुंच गरीब परिवारों तक बढ़ाई है, जिससे आज हर 10 में से 9 सिलेंडर घरेलू रसोई में उपयोग होते हैं. यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है.
सीएनजी (CNG): स्वच्छ परिवहन का आधार कंप्रेस्ड नेचुरल गैस का उपयोग वाहनों में हरित ईंधन के रूप में किया जाता है. यह प्राकृतिक गैस को उच्च दबाव (200–250 kg/cm²) पर संकुचित करके बनाई जाती है, जिससे यह अपने मूल आयतन का 1% से भी कम हिस्सा घेरती है. मीथेन प्रधान यह ईंधन दिल्ली जैसे महानगरों में प्रदूषण कम करने में मील का पत्थर साबित हुआ है. एलपीजी के विपरीत, सीएनजी गैसीय अवस्था में ही रहती है.
पीएनजी (PNG): सुविधा और सुरक्षा का नेटवर्क पाइप्ड नेचुरल गैस सीधे पाइपलाइनों के जरिए घरों और उद्योगों तक पहुंचती है. इसका मुख्य घटक मीथेन (CH 4) है, जिसमें कार्बन-टू-हाइड्रोजन अनुपात सबसे कम होता है. इस वजह से यह अन्य जीवाश्म ईंधनों की तुलना में सबसे पूर्ण और स्वच्छ तरीके से जलती है. भारत का विस्तृत पाइपलाइन नेटवर्क इसे एक निरंतर आपूर्ति वाला सुरक्षित विकल्प बनाता है.
एलएनजी (LNG): आयात और भंडारण की चुनौती नेचुरल गैस को जब -160°C तक ठंडा किया जाता है, तो वह तरल रूप ले लेती है, जिसे एलएनजी कहते हैं. भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग आधा हिस्सा एलएनजी के रूप में कतर, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों से आयात करता है. इसे विशेष क्रायोजेनिक टैंकरों में लाया जाता है और बंदरगाहों पर पुन: गैसीकरण (Regasification) के बाद पाइपलाइनों में भेजा जाता है. हालांकि, यूरोप की तुलना में भारत के पास एलएनजी भंडारण की क्षमता अभी भी सीमित है.
वर्तमान में गैस का उपयोग केवल रसोई तक सीमित नहीं है. यह उर्वरक उत्पादन (अमोनिया निर्माण), बिजली उत्पादन और रिफाइनरियों के संचालन के लिए भी अपरिहार्य है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव भारत के लिए एक चेतावनी है कि वह अपनी भंडारण क्षमता बढ़ाए और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करे.
फिलहाल, सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध जैसी स्थितियों का असर भारतीय नागरिकों के चूल्हे और अस्पतालों की ऑक्सीजन व बिजली आपूर्ति पर न पड़े.