कर्नाटक विधानसभा परिषद में हेट स्पीच बिल पास
बेंगलुरु । डेस्क: कर्नाटक की राजनीति में हेट स्पीच को लेकर घमासान तेज हो गया है. विपक्षी दल भाजपा और जेडीएस के भारी हंगामे और विरोध के बावजूद, शुक्रवार को कर्नाटक विधान परिषद में 'घृणा भाषण और घृणा अपराध (निवारण) विधेयक' पारित कर दिया गया.
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के इस कदम को एनडीए (बीजेपी-जेडीएस गठबंधन) ने 'लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश' करार दिया है और इसके खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.
इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर नफरत फैलाने वाले भाषण का आरोप सिद्ध होता है, तो उसे अधिकतम 10 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है.
यह बिल बीते 4 दिसंबर को कैबिनेट से मंजूर हुआ था और गुरुवार को विधानसभा में पारित होने के बाद अब इसे विधान परिषद की भी मंजूरी मिल गई है. अब राज्यपाल की सहमति मिलते ही यह कानून का रूप ले लेगा.
विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस सरकार इस कानून का दुरुपयोग विरोधियों की आवाज दबाने के लिए करेगी.
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बिल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है और सरकार अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पा रही है.
दूसरी ओर, हाल के दिनों में कर्नाटक भाजपा के कई बड़े नेताओं पर अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप लगे थे, जिस पर अदालतों ने भी कड़ी टिप्पणी की थी. इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस सरकार इस बिल को एक कड़े सुरक्षा उपाय के रूप में देख रही है.