जेडी वेंस ने H-1 B वीजा प्रोग्राम को खत्म करने का समर्थन किया
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एच-1बी वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह टूटा हुआ करार दिया है और इसे खत्म करने का समर्थन किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी कंपनियां इस प्रोग्राम का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह सस्ते विदेशी मजदूर रखने के लिए कर रही हैं.
रियल अमेरिकाज वॉयस पर प्रसारित एक लाइव इंटरव्यू में वेंस ने कहा, “मेरा मानना है कि एच-1बी प्रोग्राम पूरी तरह टूटा हुआ है और मैं इसे खत्म करने का पूरा समर्थन करूंगा. लेकिन जब तक यह चल रहा है, हमें अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा करनी होगी.” उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम का न सिर्फ टेक कंपनियां बल्कि अकाउंटिंग फर्में भी फायदा उठा रही हैं और अमेरिकी मजदूरों के साथ धोखाधड़ी कर रही हैं.
वेंस ने स्पष्ट किया कि उच्च कुशल विदेशी पेशेवरों को लाने और श्रम लागत घटाने के लिए वीजा का इस्तेमाल करने में फर्क है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कंपनी 60 हजार डॉलर सालाना कमाने वाले अमेरिकी अकाउंटेंट की जगह 45 हजार डॉलर वाले विदेशी अकाउंटेंट को लाती है तो यह प्रोग्राम का सही इस्तेमाल नहीं, बल्कि अमेरिकी नौकरियों को नष्ट करना है.
वेंस ने राष्ट्रपति ट्रंप के 1 लाख डॉलर के नए शुल्क प्रस्ताव का बचाव करते हुए कहा कि यह शुल्क इसलिए लाया गया ताकि केवल वही कंपनियां वीजा लें जो वास्तव में प्रतिभाशाली लोगों को लाना चाहती हैं, न कि सस्ते मजदूर.
उन्होंने बताया कि यह विचार उनके, ट्रंप और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार स्टीफन मिलर के बीच चर्चा के बाद आया जब उन्हें लगा कि कांग्रेस प्रोग्राम में सुधार नहीं करेगी.
ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने वेंस के इस इंटरव्यू को एक्स पर शेयर करते हुए लिखा, “मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं. जो लोग इससे असहमत हैं वे सिर्फ सस्ते मजदूर चाहने वाले ओपन बॉर्डर समर्थक हैं.”
हालांकि 1 लाख डॉलर का यह शुल्क अदालती चुनौतियों का सामना कर रहा है. 1 अक्टूबर को एक संघीय मजिस्ट्रेट ने प्रशासन द्वारा अनिवार्य नियम बनाने की प्रक्रिया का पालन न करने का हवाला देते हुए शुल्क पर रोक लगा दी. इससे पहले भी इस साल एक अदालत ने इसी शुल्क पर स्थगनादेश दिया था.
सितंबर में जारी एक कार्यकारी आदेश में राज्य, श्रम और गृह सुरक्षा विभागों को निर्देश दिया गया है कि एच-1बी आवेदनों की समीक्षा करते समय यह देखें कि नियोक्ता ने हाल ही में समान अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या करने की योजना है. श्रम विभाग को पुराने श्रम-स्थिति आवेदनों की भी समीक्षा करने को कहा गया है.
भारतीय पेशेवरों के लिए यह बहस महत्वपूर्ण है क्योंकि एच-1बी वीजा पाने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है. प्रोग्राम में कोई भी बड़ा बदलाव अमेरिका में नौकरी चाहने वाले या पहले से काम कर रहे भारतीय तकनीक और इंजीनियरिंग पेशेवरों को प्रभावित कर सकता है.
दूसरी ओर, एक और संघीय न्यायाधीश ने भी बुधवार को ट्रंप के इस अभूतपूर्व 1 लाख डॉलर शुल्क पर रोक लगा दी. कैलिफोर्निया के ओकलैंड में जज हेवुड गिलियम ने कहा कि यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज और स्टेट डिपार्टमेंट ने शुल्क लागू करने से पहले जरूरी नियम-निर्माण प्रक्रिया का पालन नहीं किया. जज ने यूनियनों, नियोक्ताओं और गैर-लाभकारी संगठनों के गठबंधन की याचिका पर शुल्क को मुकदमे के फैसले तक रोक दिया.