जांजगीर-चांपा में 12वीं के छात्र ने फांसी लगाकर दी जान
जांजगीर-चांपा । डेस्क: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में आरसमेटा गांव के 18 वर्षीय छात्र कमलेश जायसवाल ने मात्र 12वीं कक्षा में पढ़ते हुए घर में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. मृतक के पास से बरामद चार पन्नों के सुसाइड नोट ने स्कूल के प्राचार्य और एक शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे मानसिक उत्पीड़न और अन्याय की बात सामने आई है.
परिवार के अनुसार, कमलेश रविवार रात अपने कमरे में सोने चले गए थे. सोमवार सुबह जब वे नहीं उठे तो परिजनों ने दरवाजा तोड़कर अंदर झांका, तो कमलेश फंदे पर लटकते मिले. इस दर्दनाक नजारे ने घर-परिवार में कोहराम मचा दिया. सुसाइड नोट में कमलेश ने बताया कि वह पिछले करीब एक साल से गहरे अवसाद में जी रहा था.
नोट में उसने न्यूवोको पब्लिक स्कूल के प्राचार्य सुमंतो विश्वास और शिक्षक अनुपम पाल पर लगातार मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया. कक्षा 10वीं के समय से ही उसकी बातों को अनसुना किया गया, बार-बार दोषी ठहराया गया और कुछ घटनाओं के बाद मारपीट तक की गई.
शिकायत के बावजूद कोई न्याय नहीं मिला, जिससे उसका दर्द और बढ़ता गया. अंतिम पंक्तियों में उसने लिखा कि जीते जी तो न्याय नहीं मिला, शायद मौत के बाद मिल जाए, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.
घटना की सूचना मिलते ही आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने सुबह 11 बजे से शव को सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रबंधन और दोषी शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की.
मुलमुला पुलिस थाने के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराने की कोशिश की. प्रशासन के आश्वासन के बाद शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन समाप्त हुआ और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्राचार्य सुमंतो विश्वास और शिक्षक अनुपम पाल को उनके पदों से हटा दिया है.
पुलिस अब सुसाइड नोट, परिजनों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर गहन जांच कर रही है. जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.