जयशंकर ने ‘आत्मनिर्भरता’ का आह्वान किया
नई दिल्ली । डेस्क: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को दिल्ली में फेथ कॉन्क्लेव-2025 में बोलते हुए वैश्विक अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर में ‘आत्मनिर्भरता’ को विकसित भारत के लक्ष्य की आधारशिला बताया. उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता न केवल वैश्विक उथल-पुथल से निपटने का मानसिक दृष्टिकोण है, बल्कि यह हमारा आत्मविश्वास बढ़ाने, लचीलापन मजबूत करने और विकसित भारत की नींव रखने का आधार भी है.
जयशंकर ने भारत की सभ्यतागत विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समय की कसौटी पर खरी उतरी है और हमारी संस्कृति, परंपराओं और धरोहर को संजोए हुए है.
उन्होंने कहा, “हमारी वास्तविक ताकत हमारे लोग और उनका आत्मविश्वास रहा है. हमने प्रगति और समृद्धि की यात्रा में कई चुनौतियों का सामना किया और उन्हें पार किया.”
उन्होंने वैश्विक अस्थिरता, कोविड-19 महामारी, कई चल रहे संघर्षों और व्यापारिक व्यवधानों का जिक्र करते हुए कहा कि मजबूत घरेलू मांग वाले देशों ने बेहतर प्रदर्शन किया है और भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखेंगे.
यह बयान भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव की पृष्ठभूमि में आया है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय सामानों पर 50% शुल्क लगाया है 25% जवाबी कार्रवाई के रूप में और 25% रूस से तेल खरीदने की सजा के तौर पर.
पूर्व विदेश मंत्रालय सचिव विकास स्वरूप ने ट्रम्प के इस कदम को दबाव की रणनीति करार देते हुए भारत से दृढ़ता से खड़े रहने का आग्रह किया.
उन्होंने कहा, “अगर आप एक दबंग के सामने झुक जाते हैं, तो वह अपनी मांगें और बढ़ा देगा. भारत एक बड़ा और गौरवशाली देश है, जो किसी अन्य देश का अनुयायी नहीं बन सकता. 1950 के दशक से हमारी रणनीतिक स्वायत्तता हमारी विदेश नीति का आधार रही है.”
स्वरूप ने ट्रम्प के भारत को ‘टैरिफ किंग’ कहने पर पलटवार करते हुए कहा कि अब अमेरिका ही ‘टैरिफ किंग’ बन गया है, क्योंकि अमेरिका का औसत शुल्क 18.4% है, जबकि भारत का 15.98%. उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रम्प का यह कदम उल्टा पड़ सकता है, जिससे अमेरिका में मुद्रास्फीति बढ़ेगी और अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए इसे देश की अगली बड़ी प्राथमिकता बताया था.