इजरायल में फिलिस्तीनी कैदियों को फांसी देने की तैयारी
रामल्ला । डेस्क: इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष अब जेल की दीवारों के भीतर एक नए और भयानक मोड़ पर पहुँच गया है. हालिया मीडिया रिपोर्टों और मानवाधिकार संगठनों के दावों के अनुसार, इजरायल सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को फांसी देने की व्यापक विधायी और लॉजिस्टिक तैयारी कर रहा है. इजरायल के चैनल 13 की एक रिपोर्ट ने इस चिंता को और पुख्ता कर दिया है, जिसमें बताया गया है कि इजरायल जेल सेवा ने फांसी देने के लिए समर्पित सुविधाओं के निर्माण और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
यह कदम एक विवादास्पद ड्राफ्ट कानून के तहत उठाया जा रहा है, जिसे नवंबर में इजरायली संसद (नेसेट) में अपनी पहली मंजूरी मिली थी. इस कानून के तहत उन फिलिस्तीनी कैदियों को मौत की सजा देने का प्रावधान है, जो इजरायली नागरिकों पर घातक हमलों में शामिल रहे हैं. विशेष रूप से, यह कानून 7 अक्टूबर 2023 के हमलों में शामिल हमास के सदस्यों और वेस्ट बैंक में प्रतिरोध करने वाले फिलिस्तीनियों को लक्षित करता है.
कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस प्रस्तावित कानून को 'रंगभेदी कानून' करार दिया है. उनका तर्क है कि यह कानून स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है क्योंकि यह केवल फिलिस्तीनियों पर लागू होता है, जबकि समान अपराधों के लिए इजरायली बसने वालों या सैनिकों पर यह सजा लागू नहीं होती.
अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर रामजी ओदेह के अनुसार, इजरायल ने फिलिस्तीनी बंदियों को 'गैर-कानूनी लड़ाकों' की श्रेणी में रखा है, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों और जिनेवा कन्वेंशन के तहत मिलने वाली सुरक्षा से वंचित कर दिया गया है. रेड क्रॉस जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को कैदियों से मिलने से रोकना और वकीलों की पहुंच सीमित करना इन उल्लंघनों को और गंभीर बनाता है.
फिलिस्तीनी कैदियों के परिवारों में इस खबर के बाद दहशत का माहौल है. बेथलेहम के शरणार्थी शिविरों में रहने वाली माताओं का कहना है कि वे अब अपने बेटों की सुरक्षा को लेकर सो नहीं पा रही हैं. परिवारों का आरोप है कि जेलों के भीतर पहले से ही भुखमरी, चिकित्सा उपेक्षा और शारीरिक शोषण चरम पर है. 'फिजिशियन फॉर ह्यूमन राइट्स इन इजरायल' (PHRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक कम से कम 94 फिलिस्तीनी कैदियों की इजरायली हिरासत में मौत हो चुकी है.
इनमें से कई मौतें कथित तौर पर प्रताड़ना और इलाज के अभाव में हुई हैं. फिलिस्तीनी प्रिजनर सोसाइटी के प्रमुख अब्दुल्ला अल-जघारी ने स्थिति को 'नर्क' बताते हुए चेतावनी दी है कि फांसी का कानून अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की सरेआम धज्जियां उड़ाने जैसा है. वर्तमान में गाजा में जारी युद्ध के बीच, इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनियों की संख्या हजारों में पहुंच गई है, जिनमें से कई बिना किसी स्पष्ट आरोप के वर्षों से बंद हैं.
फिलिस्तीनी अधिकार संगठनों ने अब इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की है. कतर, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के नेतृत्व से अपील की गई है कि वे इन 'सामूहिक हत्याओं' को रोकने के लिए दबाव डालें.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस कानून को अंतिम रूप देकर लागू किया गया, तो यह न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चुनौती पेश करेगा.
दुनिया भर के मानवाधिकार समूह अब इजरायल की इन तैयारियों पर बारीक नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह मुद्दा अब केवल जेल प्रबंधन का नहीं, बल्कि मानवता और न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का बन चुका है.