ईरान: ट्रंप का बयान: “संस्थानों पर कब्ज़ा करो”, सैन्य कार्रवाई के संकेत
वॉशिंगटन । डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच तीखा और विवादास्पद बयान दिया है. ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकें रद्द कर दी हैं और प्रदर्शनकारियों से “अपने संस्थानों पर कब्ज़ा करने” का आह्वान किया है. इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि “मदद रास्ते में है”, हालांकि इसके स्वरूप को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी.
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा, “ईरानी देशभक्तों, प्रदर्शन जारी रखो अपने संस्थानों पर कब्ज़ा करो. हत्यारों और उत्पीड़कों के नाम सहेज कर रखो, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.” ट्रंप ने यह भी कहा कि जब तक प्रदर्शनकारियों की “बेतुकी हत्याएं” नहीं रुकतीं, तब तक ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं होगी.
बीते कुछ दिनों से ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना पर खुले तौर पर बात कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर सख्ती जारी रखी, तो अमेरिका “कड़े कदम” उठा सकता है.
इसी कड़ी में ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उस पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा. वहीं मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों को “तत्काल ईरान छोड़ने” की सलाह जारी की.
जब पत्रकारों ने ट्रंप से “मदद रास्ते में है” बयान का अर्थ पूछा, तो उन्होंने विवरण देने से इनकार करते हुए कहा, “आपको खुद ही इसका पता लगाना होगा.” बाद में सीबीएस न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने दोहराया कि अगर ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों को फांसी दी, तो अमेरिका “बहुत सख्त कार्रवाई” करेगा, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मृतकों की संख्या को लेकर उनके पास अभी “सटीक आंकड़े” नहीं हैं.
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, ईरान में जारी प्रदर्शनों के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि सौ से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. हालांकि, इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने अमेरिका और इज़राइल पर अशांति भड़काने का आरोप लगाया है.
विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकती है और इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं. इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान प्रोजेक्ट के निदेशक अली वाएज़ ने कहा कि ईरानी जनता एक तरफ दमनकारी शासन और दूसरी तरफ विदेशी हस्तक्षेप के बीच फंसी हुई है. उनका मानना है कि सत्ता के शीर्ष पर अचानक बदलाव से ईरान लीबिया, सीरिया या यमन जैसी अराजकता में भी जा सकता है.
इस बीच फ्रांस और क़तर जैसे देश तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं. क़तर के प्रधानमंत्री ने ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव से फोन पर बातचीत कर शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन दोहराया है, जबकि ईरान और फ्रांस के विदेश मंत्रियों के बीच भी संवाद हुआ है.