ईरान ने युद्ध विराम के लिए रखी तीन शर्तें
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष के 12वें दिन राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने युद्ध समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं. बुधवार (11 मार्च, 2026) को रूसी और पाकिस्तानी नेतृत्व से संवाद के बाद पेज़ेश्कियान ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि इस युद्ध को केवल तभी रोका जा सकता है जब ईरान के 'वैध अधिकारों' को मान्यता दी जाए, युद्ध के हर्जाने का भुगतान किया जाए और भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ पुख्ता अंतरराष्ट्रीय गारंटी प्रदान की जाए.
यह पहली बार है जब किसी शीर्ष ईरानी नेता ने युद्ध खत्म करने के लिए मुआवजे की मांग की है. इससे पहले परमाणु वार्ता के दौरान ईरान हमेशा परमाणु संवर्धन को एनपीटी के तहत अपना वैध अधिकार बताता रहा है.
दूसरी ओर, युद्ध की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले ईरान के सैन्य ठिकानों पर जारी हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि वे किसी भी समय इस युद्ध को समाप्त कर सकते हैं, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब ईरान में हमले के लिए कुछ खास बचा नहीं है.
हालांकि, इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने बताया कि उन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्यालयों, इमाम हुसैन सैन्य अकादमी और बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन केंद्रों पर 'व्यापक हवाई हमले' किए हैं.
इसके जवाब में आईआरजीसी ने भी हिजबुल्लाह के साथ मिलकर क्षेत्र में दुश्मन के ठिकानों पर पांच घंटे तक निरंतर हमले करने का दावा किया है. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी सीधी वार्ता या युद्धविराम को स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि वह हमलावरों को 'सबक सिखाने' के पक्ष में है.
ईरान की शर्ते-
ईरान के वैध अधिकारों की मान्यता (Recognition of Legitimate Rights): ईरान का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संधियों (जैसे NPT) के तहत परमाणु संवर्धन सहित उसके सभी संप्रभु अधिकारों को स्वीकार किया जाए.
हर्जाने का भुगतान (Payment of Reparations): ईरान ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान और विनाश के लिए मुआवजे या हर्जाने की मांग की है. यह पहली बार है जब ईरान ने शांति के लिए आर्थिक मुआवजे की शर्त रखी है.
भविष्य के हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गारंटी (Guarantees Against Future Aggression): तेहरान ने मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह ठोस गारंटी दे कि भविष्य में अमेरिका या इजरायल द्वारा ईरान पर दोबारा हमला नहीं किया जाएगा.