ईरान में युद्ध की तैयारी? सीमावर्ती प्रांतों को दी विशेष शक्तियां
तेहरान । डेस्क: तेहरान से मिल रही रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए ईरानी सरकार ने देश के शासन और आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए आपातकालीन योजनाएं लागू कर दी हैं. राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने तेहरान में सीमावर्ती प्रांतों के गवर्नरों और अर्थव्यवस्था मंत्री के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें युद्ध की स्थिति में गवर्नरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने का निर्णय लिया गया है.
इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य युद्ध की स्थिति में भी आवश्यक वस्तुओं, विशेष रूप से खाद्य सामग्री की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है.
सरकार द्वारा संचालित समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, गवर्नरों को अब विदेशी मुद्रा के उपयोग के बिना माल आयात करने, वस्तु विनिमय (बार्टर) करने और नाविकों को सरल सीमा शुल्क नियमों के तहत उत्पाद लाने की अनुमति देने का अधिकार दिया गया है.
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने स्पष्ट किया कि ये उपाय न केवल बाजार में संतुलन बनाए रखने और जमाखोरी रोकने के लिए हैं, बल्कि इनका उद्देश्य उन 'क्रूर प्रतिबंधों' के प्रभाव को कम करना भी है जो अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा ईरान पर थोपे गए हैं. ईरान इन प्रतिबंधों को ही अपनी वर्तमान आर्थिक बदहाली का मुख्य कारण मानता है.
हालांकि, सरकार जहां बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं ईरान की लगभग 9 करोड़ की आबादी एक अभूतपूर्व इंटरनेट शटडाउन का सामना कर रही है. देश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद 8 जनवरी को लगाया गया यह डिजिटल ब्लैकआउट अब ईरानी अर्थव्यवस्था के लिए गले की फांस बन गया है.
सरकार द्वारा बनाया गया वैकल्पिक 'इंट्रानेट' इतना धीमा है कि ऑनलाइन व्यवसाय ठप पड़े हैं और पारंपरिक बाजारों में भी ग्राहकों की भारी कमी देखी जा रही है. तेहरान के ग्रैंड बाज़ार के व्यापारियों का कहना है कि व्यापार पहले की तुलना में बेहद कम रह गया है और अनिश्चितता के माहौल ने बाजार की ऊर्जा छीन ली है.
आर्थिक मोर्चे पर ईरान की मुद्रा 'रियाल' में गिरावट जारी है. बुधवार को रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 लाख के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 7 लाख के आसपास था.
मुद्रा बाजार की इस अस्थिरता ने आम नागरिकों के बीच भारी अविश्वास पैदा कर दिया है. इसके बावजूद, सेंट्रल बैंक के प्रमुख अब्दुलनासिर हम्मती ने इसे बाजार की स्वाभाविक गति बताया है, जिसकी कट्टरपंथी मीडिया और राजनेताओं ने कड़ी आलोचना की है.
आंतरिक राजनीति में भी खींचतान कम नहीं हो रही है, जिसके चलते सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को सार्वजनिक रूप से हस्तक्षेप कर अधिकारियों को राष्ट्रपति का अपमान न करने और देश की एकता पर ध्यान केंद्रित करने की चेतावनी देनी पड़ी है.
गरीबों की मदद के लिए सरकार ने एक सब्सिडी योजना भी शुरू की है, जिसके तहत भ्रष्टाचार रोकने के लिए रियायती मुद्रा दरों को समाप्त कर दिया गया है. अब सरकार लोगों को इलेक्ट्रॉनिक कूपन के माध्यम से सीधे नकद सहायता दे रही है.
हालांकि, मुद्रा की गिरती कीमत के कारण यह सहायता ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है. जब इस योजना की घोषणा हुई थी, तब इसकी वैल्यू 7 डॉलर थी, जो अब घटकर 6 डॉलर से भी कम रह गई है.
इसके अतिरिक्त, इस योजना के लागू होने से खाना पकाने के तेल और अंडों जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं. देश में मुद्रास्फीति की दर 50 प्रतिशत के करीब बनी हुई है और शेयर बाजार में भी भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे ईरानी जनता के लिए आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण लग रहे हैं.