ईरान रियायत नहीं अपने वैध अधिकार मांग रहा है- ईरान
तेहरान । डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार की 'रियायत' की भीख नहीं मांग रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अपने वैध अधिकारों की मांग कर रहा है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि ईरान द्वारा युद्ध समाप्ति के लिए पेश किया गया प्रस्ताव पूरी तरह से न्यायसंगत, उदार और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार है.
उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर इस संकट को जानबूझकर खींचने और अनुचित मांगें थोपने का आरोप लगाया. बघाई ने जोर देकर कहा कि ईरान की मांगें स्पष्ट हैं. युद्ध का तत्काल अंत, ईरानी बंदरगाहों की अवैध नाकेबंदी और अमेरिकी 'समुद्री डकैती' को रोकना, और विभिन्न विदेशी बैंकों में अन्यायपूर्ण तरीके से फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना.
ईरान का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के शांति प्रस्ताव को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' बताकर खारिज कर दिया. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान के प्रतिनिधियों की आलोचना करते हुए संकेत दिया कि वह इन शर्तों पर समझौता नहीं करेंगे.
इस तनातनी का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, जहां होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित आवाजाही और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना उसका प्राथमिक उद्देश्य है, लेकिन इसे अमेरिका और इजरायल की 'हठधर्मिता' के कारण बाधित किया जा रहा है.
बघाई ने यूरोपीय देशों, विशेष रूप से फ्रांस और ब्रिटेन को भी चेतावनी दी कि वे इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल का मोहरा न बनें. उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों को अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए और ऐसे किसी भी सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहिए जो स्थिति को और अधिक जटिल बना दे.
ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा होर्मुज में व्यापारिक मार्ग बहाल करने के लिए सैन्य गठबंधन बनाने की कोशिशों पर ईरान ने कड़ा ऐतराज जताया है. ईरान का तर्क है कि यह युद्ध न केवल अनैतिक है बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन भी है क्योंकि इसकी शुरुआत अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता से हुई थी.
तेहरान ने वैश्विक समुदाय से जिम्मेदारी से काम करने की अपील करते हुए कहा कि क्षेत्र में शांति तभी संभव है जब ईरान के आर्थिक और संप्रभु अधिकारों का सम्मान किया जाए और उस पर थोपे गए अवैध प्रतिबंधों को हटाया जाए. फिलहाल, दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने से मध्य पूर्व में अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है.