ईरान ने पाकिस्तान को सौंपा अपना शांति प्रस्ताव
नई दिल्ली । डेस्क: तेहरान और वाशिंगटन के बीच पिछले दो महीनों से जारी भीषण संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में रविवार को एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'इर्ना' (IRNA) के अनुसार, ईरान ने क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्ताव पर अपना औपचारिक जवाब मध्यस्थ देश पाकिस्तान को सौंप दिया है. इस प्रस्ताव के केंद्र में हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वैश्विक तेल व्यापार को फिर से सुचारू रूप से शुरू करना और क्षेत्र में शत्रुता को पूरी तरह समाप्त करना शामिल है.
ईरानी सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में ईरान का पूरा ध्यान सैन्य गतिविधियों को रोकने पर केंद्रित है. दोनों पक्षों के करीबी सूत्रों ने संकेत दिया है कि इस शांति प्रयास का मुख्य उद्देश्य एक अस्थायी 'समझौता ज्ञापन' (MoU) तैयार करना है, ताकि एक विस्तृत और पूर्ण शांति समझौते पर पहुंचने से पहले हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही शुरू हो सके. हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल और विवादित मुद्दे अभी भी भविष्य की वार्ताओं के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं.
इस कूटनीतिक हलचल के बीच कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ फोन पर बातचीत की. कतरी विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को 'दबाव के उपकरण' के रूप में इस्तेमाल करना खाड़ी संकट को और अधिक गहरा कर सकता है.
उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रहे मध्यस्थता प्रयासों का सकारात्मक जवाब दें. वार्ता की मेज पर सबसे बड़ा रोड़ा ईरान के पास मौजूद उच्च समृद्ध यूरेनियम का भंडार है. संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी के अनुसार, ईरान के पास वर्तमान में लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम है जो 60 प्रतिशत तक शुद्ध है, जो हथियार-ग्रेड स्तर के बेहद करीब है.
इसी बीच ईरानी सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अकरमी निया ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरानी सेना परमाणु केंद्रों की सुरक्षा के लिए 'पूर्ण तत्परता' में है. उन्होंने आशंका जताई कि घुसपैठ या हेलीकॉप्टर ऑपरेशनों के जरिए इस भंडार को चुराने का प्रयास किया जा सकता है.
जमीनी हकीकत की बात करें तो शांति की इन कोशिशों के बावजूद रविवार को संघर्ष विराम का उल्लंघन देखा गया. कतर और कुवैत के करीब अज्ञात ड्रोनों ने एक मालवाहक जहाज को निशाना बनाया और कुवैती हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया. हालांकि इन हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इसने एक महीने पुराने नाजुक संघर्ष विराम पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि संघर्ष विराम अभी भी प्रभावी है, लेकिन ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाई गई पाबंदियों और अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी ने स्थिति को जटिल बना दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि यदि ईरान जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु कार्यक्रम को वापस लेने के समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो पूर्ण पैमाने पर बमबारी फिर से शुरू की जा सकती है.
ज्ञात हो कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद से ईरान ने इस जलमार्ग को ब्लॉक कर रखा है, जिससे वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं.
क्षेत्रीय तनाव में संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल है, जिसने रविवार को ईरान की ओर से आने वाले दो ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया. ईरान ने हालांकि इन हमलों में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है, लेकिन चेतावनी दी है कि यदि यूएई की धरती से उसके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो इसका 'करारा जवाब' दिया जाएगा. इन हमलों के कारण पिछले सप्ताह यूएई में स्कूलों को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट कर दिया गया था, जिन्हें सोमवार से फिर से खोलने की घोषणा की गई है.
इस युद्ध के बीच एक राहत भरी खबर ईरान के तेल निर्यात केंद्र 'खार्ग द्वीप' से आई है, जहाँ ईरान ने तेल रिसाव की खबरों का खंडन किया है. ईरानी अधिकारियों और क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषण निकाय (MEMAC) ने पुष्टि की है कि सैटेलाइट इमेजरी में दिखने वाले संदिग्ध धब्बों के बावजूद, वहां पाइपलाइनों या टैंकरों से कोई रिसाव नहीं हुआ है.
फिलहाल, दुनिया की नजरें पाकिस्तान के जरिए दिए गए ईरान के जवाब पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि खाड़ी देश शांति की ओर बढ़ेंगे या युद्ध की आग और भड़केगी.