ईरान में सबसे बड़ा जल संकट, राष्ट्रपति की कड़ी चेतावनी
ईरान का सबसे बड़ा जल संकट, राष्ट्रपति की कड़ी चेतावनी
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान इस दशक के सबसे भयानक जल संकट का सामना कर रहा है. स्थिति इतनी गंभीर है कि आशंका है कि राजधानी तेहरान जल्द ही रहने लायक नहीं रहेगी. शहर भर में लोग बारिश के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, वहीं राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कड़ी चेतावनी दी है कि दिसंबर में बारिश नहीं हुई तो केवल पानी की राशनिंग भी इस संकट को संभाल नहीं पाएगी.
उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, "अगर बारिश नहीं हुई, तो राशनिंग के बावजूद हमारे पास कोई पानी नहीं बचेगा."
जलवायु परिवर्तन के कारण ईरान के जलाशय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. देश लगातार छह वर्षों से सूखे की चपेट में है और गर्मियों में तापमान लगभग 122 डिग्री फ़ारेनहाइट (लगभग 50 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच जाता है. पिछले साल वर्षा का स्तर 57 वर्षों के औसत से 40% कम था, और मौसम विभाग ने दिसंबर के अंत तक शुष्क मौसम जारी रहने की भविष्यवाणी की है.
तेहरान की जल आपूर्ति पाँच बाहरी जलाशयों पर निर्भर है, जिनकी कुल जल धारण क्षमता 500 मिलियन क्यूबिक मीटर से घटकर लगभग 250 मिलियन क्यूबिक मीटर यानी लगभग आधी हो गई है. संकट केवल तेहरान तक सीमित नहीं है. दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में जल भंडार 3% से भी नीचे चला गया है.
राष्ट्रीय स्तर पर, लगभग 19 बड़े बांध (जो कुल बांधों का लगभग 10% हैं) पूरी तरह से सूख चुके हैं. इसके अलावा, इज़रायल के साथ हालिया 12-दिवसीय युद्ध ने भी जल बुनियादी ढांचे को और नुकसान पहुंचाया है.
एक स्थानीय रेस्तरां मालिक ने वर्षों से सरकार द्वारा समस्या की अनदेखी किए जाने पर आक्रोश व्यक्त किया. ऊर्जा मंत्री अब्बास अलीआबादी ने संकेत दिया है कि संकट को संभालने के लिए रात में बिजली आपूर्ति बंद करने जैसे कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं. शोधकर्ता जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को भी एक बड़ी वजह मान रहे हैं.
कैलिफ़ोर्निया स्थित शोधकर्ता अमीर आगा-कूचक ने कहा कि "समस्या की जड़ में अव्यवस्था और व्यवस्था में गहरा भ्रष्टाचार है," जहाँ शक्तिशाली संस्थानों ने बिना अनुमति के बांध और सुरंगों का निर्माण किया है.
अत्यधिक भूजल दोहन, अवैध कुओं की खुदाई और अक्षम कृषि पद्धतियों के कारण ज़मीन खारी हो रही है और कई झीलें सूख गई हैं. पानी की कमी को लेकर दक्षिण-पश्चिम खुजेस्तान प्रांत में कई बार हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
तेहरान सिटी काउंसिल के प्रमुख मेहदी चमरान ने कहा कि "शायद उस परंपरा में लौटने का समय आ गया है जब लोग रेगिस्तान में जाकर बारिश के लिए प्रार्थना करते थे."
सरकार अस्थायी समाधान के तौर पर पानी का दबाव कम करने और जलाशयों से अन्य क्षेत्रों में पानी मोड़ने के प्रयास कर रही है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि यदि दिसंबर तक बारिश नहीं होती है, तो ईरान के जल संकट को टालना लगभग असंभव हो जाएगा.