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ईरान पर हमले से पाकिस्तान में आर्थिक संकट

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05 मार्च 2026, 09:14 AM 4 मिनट में पढ़ें 2

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज

नई दिल्ली । डेस्क: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के हमलों में मौत के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण हो गई है. 'चाइना डेली' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने न केवल क्षेत्र में युद्ध की आहट तेज कर दी है, बल्कि पाकिस्तान के लिए एक बड़ा आर्थिक और कूटनीतिक संकट भी खड़ा कर दिया है. 


खामेनेई की मौत के विरोध में पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिनमें अब तक कम से कम 25 लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों घायल हैं. 

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कराची और लाहौर स्थित अमेरिकी दूतावासों पर प्रदर्शनकारियों ने हमले की कोशिश की, जिससे सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन करार दिया है.


विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध का पाकिस्तान पर सबसे घातक असर उसकी पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. 


यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ता है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होगी. इससे पाकिस्तान में ईंधन और बिजली की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होगी, जिससे आम जनता के लिए जीवन यापन करना दूभर हो जाएगा. 


इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में काम करने वाले लाखों पाकिस्तानी नागरिक अपनी नौकरियों से हाथ धो सकते हैं, जिससे देश को मिलने वाले विदेशी रेमिटेंस में भारी गिरावट आएगी. 

पाकिस्तान, जो खाड़ी देशों का एक बड़ा व्यापारिक भागीदार है, इस अस्थिरता के कारण अल्पकालिक मुद्रास्फीति और दीर्घकालिक आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकता है. पूर्व विदेश सचिव सलमान बशीर के अनुसार, यह घटना न केवल मध्य पूर्व का नक्शा बदल सकती है, बल्कि इसके विनाशकारी परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं.


गौरतलब है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद उत्पन्न हुआ युद्ध जैसा माहौल पाकिस्तान की पहले से ही लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के लिए एक "विनाशकारी झटका" साबित हो सकता है. पाकिस्तान इस समय अपनी आर्थिक रिकवरी के लिए काफी हद तक विदेशी मदद और खाड़ी देशों से आने वाले पैसे पर निर्भर है, लेकिन इस संघर्ष के कारण उसकी आर्थिक स्थिरता के हर स्तंभ पर खतरा मंडरा रहा है.


सबसे बड़ा संकट ऊर्जा और महंगाई के मोर्चे पर आएगा. पाकिस्तान अपनी तेल और गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है. यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' जैसा महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग बंद होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं. 


पाकिस्तान के लिए इसका मतलब होगा पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल, जिसके परिणामस्वरूप माल ढुलाई महंगी हो जाएगी और खाद्य पदार्थों सहित हर जरूरी चीज की कीमतें आसमान छूने लगेंगी. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे पाकिस्तान में महंगाई दर, जो पहले से ही चिंताजनक स्तर पर है, एक बार फिर अनियंत्रित हो सकती है.


दूसरा गंभीर खतरा विदेशी Remittances को लेकर है. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का एक मुख्य आधार वे लाखों पाकिस्तानी कामगार हैं जो सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों में काम करते हैं और हर महीने अरबों डॉलर स्वदेश भेजते हैं. 


यदि युद्ध लंबा खिंचता है या अन्य अरब देशों तक फैलता है, तो इन कामगारों की नौकरियां जा सकती हैं या उन्हें वहां से पलायन करना पड़ सकता है. इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट आएगी, जिससे पाकिस्तान के लिए अपने विदेशी कर्ज की किश्तें चुकाना और भी मुश्किल हो जाएगा.


इसके अतिरिक्त, व्यापार और निवेश पर भी बुरा असर पड़ेगा. युद्ध की स्थिति में समुद्री बीमा और माल ढुलाई की लागत 300% तक बढ़ सकती है, जिससे पाकिस्तान के निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना नामुमकिन हो जाएगा. 


पाकिस्तान का शेयर बाजार (PSX) पहले ही इस अनिश्चितता के कारण गिरावट दर्ज कर रहा है, जो निवेशकों के घटते भरोसे को दर्शाता है. कुल मिलाकर, यह संकट पाकिस्तान को एक ऐसे गहरे आर्थिक भंवर में धकेल सकता है जिससे बाहर निकलना उसके लिए दशकों की चुनौती बन जाएगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP