इंडिगो: विपक्ष ने केंद्र पर लगाया एकाधिकार का आरोप
नई दिल्ली । डेस्क: इंडिगो की सेवाओं में चरम अराजकता ने देशभर के यात्रियों को परेशान कर दिया है. शुक्रवार को लगभग 500 से अधिक घरेलू उड़ानें रद्द होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जबकि टिकटों के ऊंचे दामों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं. विपक्षी दलों ने इस घटना को 'व्यवस्थागत विफलता' करार देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार के एकाधिकार मॉडल को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने लिखा, 'सरकार के एकाधिकारपूर्ण व्यवस्था के कारण ही इंडिगो की सेवा समस्याओं का जन्म हुआ है. उड़ान रद्दीकरण और देरी से देश के लोग भुगत रहे हैं.' राहुल ने 2024 के 6 नवंबर को सरकार को इस मुद्दे पर चेतावनी देने वाला अपना एक लेख भी साझा किया.
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने जीरो आवर में इंडिगो की एकाधिकार शक्ति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि एक एयरलाइन ने 500 उड़ानें रद्द कर दीं, जिसका असर आम यात्रियों से लेकर सांसदों तक पर पड़ रहा है. कई सांसद वीकेंड पर घर लौटने या सोमवार को लौटने की योजना बना रहे थे, लेकिन अब वे गंभीर मुश्किल में फंस गए हैं.
भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने सांसदों के लिए वैकल्पिक उड़ान व्यवस्था की मांग की. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है और उन्होंने सिविल एविएशन मंत्री से बात की है.
संसद भवन परिसर में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, 'हम सभी जानते हैं कि देश की अधिकांश चीजें कुछ ही लोगों के हाथों में हैं और सरकार ही इसे बढ़ावा दे रही है. यह अर्थव्यवस्था, लोकतंत्र और देश के लिए सही नहीं है.'
पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि वर्तमान में देश के विमानन क्षेत्र में 92 प्रतिशत बाजार हिस्सा इंडिगो और टाटा समूह के पास है. उन्होंने कटाक्ष किया, 'दो लोग पार्टी चलाएंगे, दो लोग सरकार चलाएंगे, दो लोग व्यापार चलाएंगे तो यही नतीजा होगा.'
शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने डीजीसीए और विमानन मंत्रालय पर निशाना साधा, 'अगर ये यात्री अधिकार, सुरक्षा, किराया, विमानन और क्रू शेड्यूल के नियमों का पालन नहीं कर पाते, तो मंत्रालय बंद कर देना चाहिए!'
इंडिगो ने इस विमानन संकट के लिए तकनीकी खराबी, सर्दी के मौसम में शेड्यूल बदलाव, प्रतिकूल मौसम, बढ़ते विमान यातायात और क्रू के संशोधित कार्य समय-सारिणी को जिम्मेदार ठहराया.
पिछले महीने लागू हुए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियम के तहत एक क्रू सदस्य को दिन में 8 घंटे, सप्ताह में 35 घंटे, महीने में 125 घंटे और साल में अधिकतम 1,000 घंटे काम करना होता है. लेकिन इंडिगो के स्रोतों के अनुसार, इस नियम के बाद पायलट और केबिन क्रू की कमी हो गई है, जिससे कई उड़ानें रद्द हो रही हैं या शेड्यूल बदलना पड़ रहा है.
विमानन सेवाओं के बुरी तरह प्रभावित होने से केंद्र पर दबाव बढ़ा. विपक्ष के हमलों के बीच शुक्रवार को आपात आधार पर फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन का एक महत्वपूर्ण नियम हटा दिया गया, जिसमें 'साप्ताहिक विश्राम के बदले अन्य प्रकार की छुट्टी नहीं ली जा सकती' का प्रावधान था. यह बदलाव विमानन क्षेत्र की बढ़ती चुनौतियों को उजागर करता है, जहां एकाधिकार और नियामक ढील का मिश्रण यात्रियों की तकलीफ बढ़ा रहा है.