भारत 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा- MEA
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका द्वारा रूसी ऊर्जा खरीदारों पर भारी शुल्क लगाने के प्रावधान वाले विधेयक को पारित किए जाने के बाद भारत ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट कर दिया है कि देश अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से खरीद जारी रखेगा और अपने व्यापारिक व आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा.
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत ने हाल के महीनों में उच्च स्तरीय वार्ताओं के दौरान अमेरिका को इस कानून के कारण द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से अवगत कराया है. मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि सरकार नए घटनाक्रमों और उनके संभावित प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग निकायों के साथ मिलकर काम करेगी.
यह प्रतिक्रिया अमेरिकी प्रतिनिधि सभा द्वारा 'लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' विधेयक को 262-159 के बहुमत से पारित करने के बाद आई है. इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस आयात करने वाले पांच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक का शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है.
चूंकि भारत और चीन, रूसी कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए इस कदम का असर दोनों देशों पर पड़ सकता है. हालांकि, विधेयक सीधे तौर पर शुल्क लागू नहीं करता, बल्कि राष्ट्रपति को खास परिस्थितियों में ऐसा करने का अधिकार देता है.
अमेरिका के इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है, लेकिन विदेश मंत्रालय के इस बयान से स्पष्ट है कि भारत अपने आर्थिक हितों और देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की रक्षा के लिए बाजार की बदलती स्थितियों के अनुसार ही कूटनीतिक और व्यापारिक फैसले लेगा.