भारत अपनी शर्तों पर ट्रेड एग्रीमेंट करेगा- पीयूष गोयल
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारत अमरीका के साथ किसी भी नये द्विपक्षीय व्यापार समझौते को किसी निश्चित समयसीमा के दबाव में नहीं करेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि नई दिल्ली अपनी शर्तों पर ही व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रही है.
गोयल ने कहा, "राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुये भारत हमेशा विकसित देशों के साथ समझौते के लिए तैयार है, बशर्ते दोनों पक्षों के लिए पारस्परिक लाभ सुनिश्चित हो."
इस बयान से पहले मार्च में गोयल ने अमरीका में ट्रंप प्रशासन के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के साथ व्यापार समझौते पर चर्चा की थी. हालांकि, नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच अभी तक इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है.
इस बीच, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को विभिन्न देशों के उत्पादों पर पारस्परिक शुल्क लगाने की घोषणा की थी, जिसमें भारत के उत्पादों पर 26 प्रतिशत शुल्क शामिल था. फिर भी, ट्रंप ने इस नीति को लागू करने से पहले 90 दिनों की मोहलत दी थी, जो 9 जुलाई को समाप्त हो रही है. इस्पात और एल्यूमीनियम उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को हालांकि बरकरार रखा गया है.
ट्रंप ने संकेत दिया है कि 9 जुलाई के बाद वह इस समयसीमा को और नहीं बढ़ायेंगे. ऐसे में भारत-अमरीका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की अटकलें तेज हो गई हैं. जून के अंत में चीन के साथ व्यापार समझौता पूरा करने के बाद ट्रंप ने भारत को अपना अगला लक्ष्य बताया था.
गोयल ने कहा, "हम यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड, ओमान, अमरीका, चिली और पेरू जैसे कई देशों के साथ समझौतों के लिये बातचीत कर रहे हैं."
हालांकि, क्या यह बातचीत 9 जुलाई तक परिणाम दे पायेगी? इस सवाल पर गोयल ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "मुक्त व्यापार समझौता तभी संभव है जब दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखा जाये.
भारत अपने हितों की रक्षा करते हुये ही समझौता करेगा." उन्होंने मार्च में अमरीका में हुई बैठक के बाद भी 'इंडिया फर्स्ट' नीति के तहत व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की बात कही थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली और वाशिंगटन के बीच पारस्परिक हितों को संतुलित करते हुए व्यापार समझौते की रूपरेखा तैयार करना आसान नहीं होगा. इसका कारण यह है कि चीन की तरह भारत के पास अमेरिका पर निर्भरता का वह मजबूत आधार नहीं है, जैसा कि बिरल खनिजों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कच्चे माल तक में चीन के मामले में है.
गौरतलब है कि हाल ही में वाणिज्य मंत्रालय के विशेष सचिव राजीव अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अमरीका से व्यापार समझौते के मसौदे पर चर्चा के बाद स्वदेश लौटा है. इसके तुरंत बाद गोयल का यह बयान सामने आया है.